मुजफ्फरपुर समेत 6 जिलों में फंसी 1000 करोड़ की सरकारी राशि, उपयोगिता प्रमाण पत्र न मिलने पर विभाग सख्त
विकास कार्यों पर सवाल: 1000 करोड़ का हिसाब गायब
बिहार के पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित करीब 1000 करोड़ रुपये की राशि का हिसाब-किताब सवालों के घेरे में है। मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के छह जिलों में इस भारी-भरकम राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं किया गया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
किन जिलों पर है गाज?
वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के इस मामले में मुजफ्फरपुर के अलावा शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले शामिल हैं। महालेखाकार कार्यालय द्वारा की गई हालिया समीक्षा में इन जिलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई गई थी। ऑडिट टीम ने पाया कि अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी संबंधित जिलों ने इसका कोई ठोस ब्योरा या प्रमाण पत्र विभाग को नहीं सौंपा है।
कहां खर्च हुई यह राशि?
यह राशि मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए जारी की गई थी। इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:
- गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम।
- पंचायत सरकार भवनों का निर्माण।
- अन्य ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण योजनाएं।
प्रमंडलीय आयुक्त के सचिव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित जिलाधिकारियों और पंचायती राज पदाधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि लंबित राशि का समायोजन अविलंब पूरा किया जाए ताकि इसकी रिपोर्ट महालेखाकार कार्यालय को भेजी जा सके।
कन्या विवाह मंडप योजना की सुस्त रफ्तार
वित्तीय चूक के अलावा, समीक्षा बैठक में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप निर्माण योजना’ की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई गई। इन छह जिलों में 282 भूखंडों का चयन तो कर लिया गया, लेकिन निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 70 योजनाओं को तकनीकी स्वीकृति और मात्र 37 को प्रशासनिक स्वीकृति मिल पाई है।
प्रशासन ने अब इन सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए। यदि समय रहते इन योजनाओं का हिसाब और निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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