मोतीपुर सीएचसी में लापरवाही की हदें पार: नस कटने के बाद दो घंटे तक स्ट्रेचर पर तड़पता रहा मजदूर, एंबुलेंस नदारद
मुजफ्फरपुर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल व्यवस्था का नज़ारा
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शनिवार को स्वास्थ्य सेवाओं की घोर लापरवाही सामने आई। पैर की नस कटने से गंभीर रूप से घायल एक मजदूर लगभग दो घंटे तक स्ट्रेचर पर दर्द से कराहता रहा, लेकिन उसे अस्पताल से सरकारी एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाई। इस घटना ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को आक्रोशित कर दिया, जिन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
जानकारी के अनुसार, नरियार नवादा निवासी 45 वर्षीय भगीरथ सहनी लकड़ी चीरने के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गए। उनके बाएं पैर की नस कट गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में मोतीपुर सीएचसी लाया गया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) रेफर कर दिया।
एंबुलेंस के इंतजार में बीता लंबा समय
रेफर किए जाने के बावजूद, भगीरथ सहनी को एसकेएमसीएच ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। नतीजतन, वे लगभग दो घंटे तक स्ट्रेचर पर असहनीय पीड़ा झेलते रहे। अस्पताल परिसर में जमा भीड़ ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। लोगों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त एंबुलेंस सेवा देने का प्रावधान है, लेकिन अक्सर गंभीर मरीजों को समय पर यह सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हो जाता है।
सीएचसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रश्मि कुमारी ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को रेफर कर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय अस्पताल की एंबुलेंस जच्चा-बच्चा को छोड़ने गई हुई थी, जिसके कारण मजदूर को ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताई समस्या की जड़
इस गंभीर लापरवाही के संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि पहले इमरजेंसी में एक एंबुलेंस हमेशा अस्पताल परिसर में उपलब्ध रहती थी। हालांकि, उन्होंने बताया कि जेएन प्लस (एक गैर-सरकारी संगठन) द्वारा अब इस तरह की व्यवस्था रखने से मना कर दिया गया है, जिसके कारण मरीजों को एंबुलेंस की अनुपलब्धता के चलते परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह घटना एक बार फिर राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस सेवाओं की बदहाली और मरीजों को होने वाली परेशानियों को उजागर करती है। समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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