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मुजफ्फरपुर का मोस्ट वांटेड सोनू गोपालगंज से गिरफ्तार: 5 साल से पुलिस को दे रहा था चकमा

पांच साल की फरारी का अंत

मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए सिरदर्द बना कुख्यात अपराधी सोनू कुमार आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। बिहार एसटीएफ ने एक गुप्त सूचना के आधार पर गोपालगंज जिले के सदर थाना क्षेत्र से उसे धर दबोचा। सोनू पिछले पांच वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।

क्या है पूरा मामला?

सोनू कुमार साहेबगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला है और लंबे समय से कई गंभीर आपराधिक वारदातों में वांछित था। वर्ष 2021 में साहेबगंज थाने में दर्ज कांड संख्या 516/21 में वह मुख्य नामजद आरोपी था। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 394, 307 और 34 के तहत हत्या के प्रयास और डकैती जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं। पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी, लेकिन वह हर बार पुलिस की घेराबंदी से बच निकलने में कामयाब हो जाता था।

एसटीएफ की विशेष कार्रवाई

एसटीएफ की विशेष खुफिया इकाई को सोनू के गोपालगंज में छिपे होने की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया और छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से एक मोबाइल फोन और एक बाइक बरामद की गई है। पुलिस अब उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है ताकि उसके नेटवर्क और उसे पनाह देने वाले मददगारों का पता लगाया जा सके।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

फिलहाल आरोपी को स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। मुजफ्फरपुर पुलिस अब उसे रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि पुराने मामलों में गहन पूछताछ की जा सके। पुलिस का मानना है कि सोनू की गिरफ्तारी से क्षेत्र में सक्रिय गिरोहों और उसके साथियों के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। इस कार्रवाई से इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि सोनू का नाम कई बड़ी आपराधिक घटनाओं से जुड़ा रहा है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आगे की तफ्तीश में जुटी है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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