मुजफ्फरपुर: सरकारी फाइलों में ‘मृत’ घोषित हुई जिंदा वृद्धा, पेंशन बंद होने से भुखमरी की कगार पर
प्रशासनिक लापरवाही की हद: जीवित महिला को कागजों में दिखाया मृत
मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 75 वर्षीय विधवा को सरकारी तंत्र ने कागजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के संजय सिनेमा रोड की रहने वाली पवितर देवी पिछले कई महीनों से अपनी वृद्धा पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
पेंशन रुकी, तो जीवन-यापन बना चुनौती
पवितर देवी के लिए वृद्धा पेंशन ही उनके जीवन का मुख्य सहारा थी। विभागीय रिकॉर्ड में हुई इस बड़ी चूक के कारण उनकी पेंशन राशि का भुगतान रोक दिया गया है। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित कार्यालयों में जाकर अपनी जीवित होने का प्रमाण दिया, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के आगे उनकी एक न चली। आर्थिक तंगी के कारण अब उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
‘भूत’ कहे जाने का दंश झेल रही पीड़िता
इस प्रशासनिक भूल ने केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाया, बल्कि पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना भी दी है। पवितर देवी ने बताया कि समाज में लोग अब उन्हें मजाक में ‘भूत’ कहकर बुलाने लगे हैं। यह स्थिति उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रही है। एक जीवित इंसान के लिए खुद को मृत साबित करने की जद्दोजहद करना बेहद दुखद और शर्मनाक है।
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा की मदद ली। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। अधिवक्ता ने इसे मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन करार दिया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के एक जीवित व्यक्ति को मृत कैसे घोषित कर दिया गया? अब सभी की निगाहें मानवाधिकार आयोग के रुख पर टिकी हैं कि कब तक इस बुजुर्ग महिला को न्याय मिलेगा और कब उनके रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जाएगा।
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