मुजफ्फरपुर में जमीन खरीदना होगा और महंगा: नगर निकायों में बदलेगा एमवीआर का गणित
मुजफ्फरपुर के नगर निकायों में जमीन के नए दाम तय करने की तैयारी
मुजफ्फरपुर जिले के तीन नगर परिषदों और सात नगर पंचायतों में जमीन की खरीद-बिक्री अब महंगी होने वाली है। जिला प्रशासन ने इन शहरी क्षेत्रों में जमीन के वर्गीकरण को नए सिरे से व्यवस्थित करने का निर्णय लिया है। अब तक इन इलाकों में शहरी मानकों के अनुरूप भूमि का वर्गीकरण नहीं हो पाया था, जिसके कारण निबंधन (रजिस्ट्री) की प्रक्रिया और एमवीआर (न्यूनतम वैल्यू रजिस्टर) में विसंगतियां बनी हुई थीं।
सड़कों के आधार पर तय होगी जमीन की कीमत
राज्य सरकार के नए निर्देशों के बाद, अब इन नगर निकायों में सड़कों की स्थिति के आधार पर जमीन का वर्गीकरण किया जाएगा। जिला पदाधिकारी ने संबंधित नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र की अधिसूचित सड़कों की सूची तत्काल जिला निबंधन कार्यालय को सौंपें। इस सूची के आधार पर ही जमीन का एमवीआर निर्धारित किया जाएगा, जिससे स्पष्ट होगा कि मुख्य सड़क, व्यावसायिक या आवासीय क्षेत्र की जमीन की कीमत क्या होगी।
पेरिफेरल क्षेत्रों पर विशेष नजर
नगर परिषद से चार किलोमीटर और नगर पंचायत से दो किलोमीटर की परिधि वाले इलाकों को ‘पेरिफेरल क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में अब तक वर्गीकरण का काम अधूरा था, लेकिन अब यहां की जमीन का मूल्यांकन नए सिरे से होगा। अंचलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन पेरिफेरल क्षेत्रों के सभी मौजों का विवरण उपलब्ध कराएं। उल्लेखनीय है कि इन क्षेत्रों में स्टांप शुल्क ग्रामीण इलाकों की तुलना में पहले से ही अधिक है, और नए मूल्यांकन के बाद एमवीआर में भारी उछाल आने की संभावना है।
किन इलाकों पर होगा असर?
इस बदलाव का सीधा असर कांटी, मोतीपुर और साहेबगंज नगर परिषद के साथ-साथ बरूराज, सरैया, तुर्की कुढ़नी, माधोपुर सुस्ता, सकरा, मुरौल और मीनापुर नगर पंचायतों पर पड़ेगा। अब तक इन क्षेत्रों में एमवीआर काफी कम था, लेकिन नए वर्गीकरण के बाद औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक श्रेणियों के तहत जमीन की दरें बढ़ जाएंगी।
प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि शहरी विकास के साथ-साथ भूमि निबंधन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी। हालांकि, आम लोगों के लिए अब अपने सपनों का घर या जमीन खरीदना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला साबित होगा।
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