बोचहा में गूंजे कबीर के दोहे: बुधौली में संत शिरोमणि की जयंती पर सामाजिक समरसता का संकल्प
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा प्रखंड स्थित बुधौली गांव में संत शिरोमणि कबीर दास की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। अनूठा निवास के सभा कक्ष में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में वक्ताओं ने कबीर के विचारों को वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुनेश्वर ठाकुर ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार आचार्य चंद्र किशोर पाराशर उपस्थित रहे।
रूढ़ियों के खिलाफ कबीर का स्वर
समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य चंद्र किशोर पाराशर ने कहा कि कबीर दास केवल एक संत नहीं, बल्कि समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने समय में व्याप्त अंधविश्वास, सामाजिक भेदभाव और कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया था। आचार्य ने रेखांकित किया कि कबीर किसी संकीर्ण दायरे में नहीं बंधे थे; उनका दर्शन सत्य, प्रेम और मानव कल्याण पर आधारित था। उन्होंने बताया कि कबीर के निधन के बाद उनके अनुयायियों ने कबीर पंथ की स्थापना की, जो निराकार ब्रह्म की उपासना और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि मानता है।
युवाओं से समरसता का आह्वान
कार्यक्रम के अध्यक्ष मुनेश्वर ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि कबीर के दोहे सदियों बाद भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे कबीर के विचारों को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज को जोड़ने की आवश्यकता है, कबीर का भाईचारे का संदेश ही एकमात्र समाधान है।
भक्तिमय रहा वातावरण
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों ने कबीर के निर्गुण भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर शांतनु कुमार, आयुष शेखावत, रवि कुमार, कन्हाई कुमार, सनी कुमार, संध्या कुमारी, नीलू कुमारी, राजो देवी और रंजना देवी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने अपने विचार साझा किए।
संकल्प के साथ समापन
समारोह के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संत कबीर के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। यह निर्णय लिया गया कि समाज में समानता, प्रेम और सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम का समापन कबीर के मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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