मुजफ्फरपुर नगर निगम: योजनाओं की जाँच में अब बाहरी विशेषज्ञों की एंट्री, महापौर की नई रणनीति से सियासी हलचल
मुजफ्फरपुर नगर निगम में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी भी स्वीकृत योजना पर सीधे काम शुरू नहीं होगा, बल्कि पहले उसकी तकनीकी और आवश्यकता के आधार पर कड़ी जांच की जाएगी। इस नई व्यवस्था में बाहरी तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया पर आंतरिक राजनीतिक दबाव कम होने की उम्मीद है।
यह कदम महापौर और नगर आयुक्त के बीच लगातार हुई बैठकों के बाद उठाया गया है। दरअसल, सशक्त स्थायी समिति के चुनाव में पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी खेमे के प्रत्याशियों की जीत के बाद निगम की राजनीति में उनका दबदबा बढ़ा था। शुरुआती बैठकों में स्थायी समिति ने महापौर के कई एजेंडों को खारिज करते हुए 200 से अधिक योजनाओं को मंजूरी दी थी। अब महापौर की यह नई रणनीति इस समीकरण को बदलने की कोशिश मानी जा रही है।
जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जांच में बाहरी तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। नगर आयुक्त ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग (RCD), बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (BUIDCO) और जिला परिषद के कार्यपालक अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इनके सहयोग के लिए निगम के कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सहायक अभियंता, संबंधित वार्ड के कनीय अभियंता और प्रशासनिक स्तर पर दोनों उप नगर आयुक्त भी शामिल होंगे।
यह समिति किसी भी योजना की वास्तविक जरूरत, स्थल की स्थिति और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच करेगी। इस जांच के बाद ही योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
योजनाओं पर उठे थे सवाल
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब स्थायी समिति और बोर्ड से मंजूर कई योजनाओं को लेकर महापौर, उप महापौर और कुछ पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए थे। आरोप लगे थे कि कुछ ऐसी सड़कों को भी दोबारा निर्माण के लिए योजना में शामिल किया गया था, जिनका निर्माण हाल ही में हुआ था। कुछ पार्षदों ने बैठकों में यह भी आरोप लगाया था कि राजनीतिक समीकरणों के आधार पर योजनाओं की सूची तैयार की गई और उसे स्थायी समिति से मंजूरी दिलाई गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आज सशक्त स्थायी समिति की एक अहम बैठक होने जा रही है। नई जांच व्यवस्था लागू होने के बाद यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि बैठक में योजनाओं की जांच और क्रियान्वयन को लेकर क्या रुख सामने आता है और महापौर बनाम स्थायी समिति की सियासी खींचतान किस दिशा में बढ़ती है। यह नई व्यवस्था मुजफ्फरपुर में विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में कितनी सफल होती है, यह आने वाला समय बताएगा।
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