ई-चालान निपटारे में मुजफ्फरपुर ने रचा इतिहास, पूरे बिहार में दूसरा स्थान और उत्तर बिहार में अव्वल
राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक ई-चालान के निष्पादन में मुजफ्फरपुर जिले ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे बिहार में दूसरा स्थान हासिल किया है। राजधानी पटना पहले पायदान पर रही, जबकि भागलपुर तीसरे स्थान पर रहा। उत्तर बिहार के जिलों में मुजफ्फरपुर ने अव्वल स्थान प्राप्त किया है, जिससे जिले को बड़ी उपलब्धि मिली है। इस दौरान वर्षों से लंबित ट्रैफिक चालानों का निपटारा कर आम लोगों ने राहत की सांस ली।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से पूरे बिहार में कुल 73,919 लंबित ट्रैफिक ई-चालानों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इस ऐतिहासिक पहल से राज्य सरकार और परिवहन विभाग के खजाने में कुल 8 करोड़ 84 लाख 72 हजार 960 रुपये का रिकॉर्ड राजस्व जमा हुआ। निष्पादित किए गए कुल चालानों में से 67,495 चालान ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गए थे, जबकि 6,424 चालानों का निपटारा सीधे परिवहन विभाग द्वारा किया गया।
योजनाबद्ध तैयारी से मिली सफलता
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पिछली लोक अदालत में भी मुजफ्फरपुर जिले ने राज्य भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। हालांकि, इस बार लोक अदालत से पहले ही चालान सत्यापन का कार्य योजनाबद्ध तरीके से और अधिक प्रभावी ढंग से किया गया था। पूर्व सत्यापन के कारण इस बार निष्पादित चालानों की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप विभाग को रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई। इस तैयारी ने न केवल प्रक्रिया को सुगम बनाया बल्कि अधिक से अधिक लोगों को अपने लंबित चालानों का निपटारा करने में मदद भी की।
चालान अपडेट और तकनीकी सहायता
परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन वाहन स्वामियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने चालान की राशि जमा कर दी है, उनका डेटा विभागीय पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है। यदि किसी तकनीकी खामी के कारण किसी उपभोक्ता का चालान निष्पादन पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है, तो उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे उपभोक्ता लोक अदालत से प्राप्त समझौता पत्र लेकर संबंधित जिले के डीटीओ कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं, जहां से उनके रिकॉर्ड को तुरंत अपडेट कर दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस सफल आयोजन ने न केवल सरकार के राजस्व में वृद्धि की है, बल्कि नागरिकों को भी लंबित कानूनी प्रक्रियाओं से मुक्ति दिलाई है, जिससे न्याय प्रणाली पर बोझ कम हुआ है।
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