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एसकेएमसीएच: आपातकालीन वार्ड के ड्रेसिंग रूम में छत से टपकता पानी, मरीजों की बढ़ी परेशानी

मुजफ्फरपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में कुव्यवस्था का एक और मामला सामने आया है। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड के ड्रेसिंग रूम की छत से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए जोखिम भरी है, बल्कि अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।

इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इस नमी भरे और असुरक्षित माहौल में अपनी ड्रेसिंग करानी पड़ रही है। छत से लगातार पानी टपकने के कारण कमरे के फर्श पर हर समय नमी बनी रहती है, जिससे फिसलन का खतरा बढ़ गया है। यह स्थिति विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है जो चोटिल हैं या चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनके लिए ऐसी जगह पर आना-जाना और भी मुश्किल हो जाता है।

मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को जोखिम

ड्रेसिंग रूम में पानी टपकने से न केवल मरीजों को असुविधा हो रही है, बल्कि उनके साथ आए परिजनों और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फर्श पर जमा पानी या फिसलन की वजह से गिरने का डर बना रहता है, जो पहले से ही बीमार या घायल व्यक्ति के लिए गंभीर परिणाम दे सकता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं है, जहाँ स्वच्छता और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

अधीक्षक ने बीएमएसआईसीएल को ठहराया जिम्मेदार

इस गंभीर समस्या पर एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के रखरखाव और मरम्मत से संबंधित सभी कार्यों की जिम्मेदारी बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) की है। अधीक्षक ने यह भी जानकारी दी कि इस संबंध में संबंधित एजेंसी को सूचित कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि बीएमएसआईसीएल इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इसका समाधान करता है।

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और रखरखाव की कमी को उजागर करती है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए न केवल चिकित्सा उपकरणों और डॉक्टरों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, बल्कि एक स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण भी उतना ही आवश्यक है। उम्मीद है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा ताकि मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के उपचार मिल सके।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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