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पटना-मुजफ्फरपुर रैपिड रेल: अब एक घंटे में तय होगी दूरी, औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ

पटना और मुजफ्फरपुर के बीच यात्रा अब और भी तेज और सुगम होने वाली है। क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के लिए अध्ययन शुरू हो गया है, जिसका उद्देश्य दोनों शहरों के बीच की दूरी को मात्र एक घंटे में तय करना है। यह परियोजना हाजीपुर के रास्ते इन प्रमुख शहरों को जोड़ेगी और दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों तथा छात्रों के लिए वरदान साबित होगी।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है। यह रैपिड रेल कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर में संचालित क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट व्यवस्था की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, लेकिन यह मेट्रो से अलग होगा। इसका मुख्य लक्ष्य लंबी दूरी के यात्रियों को कम समय में एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाना है।

परियोजना का उद्देश्य और लाभ

इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच आवागमन को आसान बनाना है। वर्तमान में पटना से मुजफ्फरपुर जाने में लगभग दो घंटे लगते हैं, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने पर यह समय आधा हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह कॉरिडोर इन तीनों क्षेत्रों के प्रमुख औद्योगिक इलाकों को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • समय की बचत: पटना-मुजफ्फरपुर की दूरी एक घंटे में तय होगी।
  • औद्योगिक कनेक्टिविटी: तीनों शहरों के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • यात्री सुविधा: दैनिक यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यात्रा आसान होगी।
  • बहु-मॉडल एकीकरण: रैपिड रेल स्टेशनों को पटना मेट्रो, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावना तलाशी जाएगी, ताकि यात्रियों को एक साधन से दूसरे साधन पर आसानी से जाने की सुविधा मिल सके।

एनसीआरटीसी यह आकलन करेगा कि पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजाना कितने लोग सफर करते हैं और किन इलाकों से सबसे अधिक यात्री मिल सकते हैं। इसी आधार पर संभावित रूट और स्टेशन तय किए जाएंगे। जमीन की उपलब्धता, निर्माण की लागत, तकनीकी विकल्प और यातायात दबाव का भी गहन अध्ययन किया जाएगा।

तकनीकी और वित्तीय पहलू

रैपिड रेल के लिए पूरी तरह से अलग और समर्पित एलिवेटेड या अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह ट्रेन 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। मई 2024 में प्रदेश सरकार ने आरआरटीएस को मंजूरी दी थी, जिसके तहत पटना से मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर की कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है। छोटे शहरों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। एएआर और डीपीआर पर अनुमानित 31.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट तक पहुंच के विकल्पों का भी अध्ययन किया जाएगा, जिससे हवाई यात्रियों को भी सुविधा मिल सके। यह परियोजना बिहार के परिवहन परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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