मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन विस्फोट: रोजी-रोटी गंवाने वाले दुकानदारों का फूटा गुस्सा, मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम
मुजफ्फरपुर के गोबरसही इलाके में हुए गैस पाइपलाइन विस्फोट ने कई परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी है। सोमवार को हुए इस हादसे में दुकानें और घर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे प्रभावित लोगों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अपनी बर्बादी का मुआवजा मांगने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में दुकानदार और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और गोबरसही चौक को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
सोमवार को गोबरसही-डुमरी रोड पर गैस पाइपलाइन में हुए विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई थी। इस आग की चपेट में आकर लगभग दो दर्जन मकान और दुकानें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस हादसे में करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत से अपनी दुकानें खड़ी की थीं, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। उनके सामने अब अपने परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जारी रखना भी मुश्किल हो गया है।
लापरवाही का आरोप और मुआवजे की मांग
दुकानदार प्रमोद कुमार और आमोद सहित कई अन्य प्रभावितों ने बताया कि उनकी दुकानों से होने वाली कमाई ही उनके परिवारों का एकमात्र सहारा थी। इस हादसे ने उनकी पूरी जमा-पूंजी खत्म कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हादसा संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है। ऐसे में, उनका मानना है कि इस बड़े नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी प्रशासन की ही बनती है। प्रदर्शनकारी क्षतिग्रस्त दुकानों, मकानों और सामान का उचित आकलन कर जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग कर रहे थे।
एसडीओ ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
सड़क जाम और बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही सदर थाने की पुलिस और पूर्वी अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) आनंद उत्सव मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों से बातचीत कर उन्हें शांत करने और जाम हटाने का प्रयास किया। एसडीओ पूर्वी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि हादसे में जिन लोगों की दुकानें, मकान या अन्य सामान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन सभी की एक विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि नुकसान का आकलन होने के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्रशासन के इस आश्वासन के बावजूद प्रभावित लोग मुआवजे की अपनी मांग पर अड़े रहे और उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ था। इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन पर जांच और त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
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