एसकेएमसीएच में आग की अफवाह से हड़कंप: गर्भवती महिलाओं के परिजनों में मची भगदड़, जांच के आदेश
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में उस समय अफरातफरी मच गई जब मातृ-शिशु सदन में आग लगने की झूठी खबर फैल गई। इस अफवाह के कारण गर्भवती महिलाओं के परिजनों में भगदड़ मच गई और वे अपनी मरीजों को लेकर अस्पताल से बाहर भागने लगे। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है।
यह घटना सोमवार दोपहर की है जब मातृ-शिशु सदन के भीतर अचानक किसी ने आग लगने की अफवाह फैला दी। आग लगने की खबर सुनते ही वार्ड में भर्ती गर्भवती महिलाओं के साथ आए परिजनों में दहशत फैल गई। अपनी जान और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित परिजन बिना किसी देरी के अपनी गर्भवती महिलाओं को लेकर अस्पताल परिसर से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। इस आपाधापी में अस्पताल के गलियारों और बाहर निकलने के रास्तों पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे चीख-पुकार मच गई।
अस्पताल प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
भगदड़ और शोरगुल की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया। अस्पताल प्रबंधक संजय कुमार शाह सुरक्षा गार्डों और सुपरवाइजरों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मोर्चा संभाला और मरीजों व उनके परिजनों को शांत करने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को समझाया कि आग लगने की कोई घटना नहीं हुई है और यह केवल एक अफवाह है। उनकी मुस्तैदी और सूझबूझ से जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया गया।
राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी मरीज या परिजन को कोई गंभीर चोट नहीं आई। अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की है कि सभी सुरक्षित हैं और स्थिति सामान्य हो गई है।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस गंभीर घटना को देखते हुए एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने सुरक्षा प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस तरह की जानलेवा अफवाह फैलाने वाले शरारती तत्वों की पहचान की जाए।
अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मरीजों व उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह घटना अस्पताल सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा और उसे और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देती है।
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