बेगूसराय सदर अस्पताल की संवेदनहीनता: सर्जिकल वार्ड में 5 घंटे तक पड़ा रहा शव, मरीज सहमे
अस्पताल की बदहाली का जीता-जागता प्रमाण
बिहार के ‘नंबर वन’ अस्पताल का दावा करने वाले बेगूसराय सदर अस्पताल में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सर्जिकल वार्ड में भर्ती एक अज्ञात अधेड़ व्यक्ति की मौत के बाद उसका शव पांच घंटे तक उसी बेड पर पड़ा रहा, जहाँ अन्य मरीज अपना इलाज करा रहे थे। इस दौरान अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का नजारा देखने को मिला।
मरीजों के बीच दहशत का माहौल
मृतक व्यक्ति को चार दिन पहले एक सड़क हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार की सुबह उसकी मौत हो गई, लेकिन अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने शव को वहां से हटाने के बजाय पुलिस का इंतजार करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने बार-बार स्टाफ से शव को हटाने की गुहार लगाई, क्योंकि शव के बीच इलाज कराना न केवल मानसिक रूप से कष्टदायक था, बल्कि वहां डर का माहौल भी बन गया था। नर्सिंग स्टाफ का तर्क था कि शव उठाना उनका काम नहीं है और अस्पताल में ऐसी मौतें आम हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की कार्यशैली
जब परिजनों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, तब जाकर मामले ने तूल पकड़ा। जदयू नेता अरुण महतो के हस्तक्षेप के बाद नगर थाने की पुलिस हरकत में आई। हालांकि, शव को ले जाने के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पुलिस अधिकारी हाथ में झोला लिए आगे-आगे चल रहे थे, जबकि एक महिला सिपाही को स्ट्रेचर खींचते हुए देखा गया।
इलाज पर भी उठे गंभीर सवाल
यह घटना केवल शव को हटाने में हुई देरी तक सीमित नहीं है। परिजनों का आरोप है कि मृतक का इलाज भी भगवान भरोसे था। चार दिन पहले भर्ती होने के बाद उसे केवल एक बार सलाइन चढ़ाया गया था। शनिवार को भी वह घंटों घुटने के बल बैठा रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। जब परिजनों ने शोर मचाया, तब जाकर नर्स ने उसे दोबारा सलाइन चढ़ाया। यह पूरी घटना बेगूसराय सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था और मरीजों के प्रति बरती जा रही उपेक्षा को उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या ‘नंबर वन’ अस्पताल का दर्जा केवल कागजों तक ही सीमित है?
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