मानसिक प्रताड़ना और छुट्टी न मिलने से परेशान लिपिक ने दिया इस्तीफा, बीडीओ ने जताई अनभिज्ञता
सरैया प्रखंड कार्यालय में लिपिक ने लगाया गंभीर आरोप
मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड कार्यालय में संविदा पर कार्यरत लिपिक ध्रुव कुमार साह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में कार्यालय के अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अवकाश आवेदनों को लगातार अस्वीकृत करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना प्रखंड कार्यालय में व्याप्त कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।
ध्रुव कुमार साह ने बताया कि वे 1 फरवरी 2022 से लिपिक के रूप में कार्यरत थे और उनकी संविदा अवधि का विस्तार 31 जनवरी 2026 तक किया गया था। उन्होंने अपनी पत्नी की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए बताया कि उनकी पत्नी कैंसर से पीड़ित हैं और उनका इलाज कोलकाता तथा पटना के पारस अस्पताल में चल रहा है। इस कठिन समय में उन्हें अपनी पत्नी की देखभाल के लिए अवकाश की आवश्यकता थी, लेकिन उनके अवकाश आवेदनों को लगातार नामंजूर किया जा रहा था।
त्यागपत्र सौंपने की प्रक्रिया और बीडीओ की प्रतिक्रिया
इन परिस्थितियों से तंग आकर ध्रुव कुमार साह ने 16 जुलाई 2026 को कार्यालय के डाक पंजी के माध्यम से अपना त्यागपत्र बीडीओ को सौंपा। उन्होंने इसकी एक प्रतिलिपि जिलाधिकारी (डीएम) और उपसमाहर्ता (स्थापना), मुजफ्फरपुर को भी भेजी। साह का कहना है कि सहयोग शिविर में व्यस्तता के कारण बीडीओ ने डाक पंजी का अवलोकन नहीं किया, जिसके बाद उन्होंने अपना त्यागपत्र व्हाट्सएप और कार्यालय के अन्य माध्यमों से भी उपलब्ध कराया।
हालांकि, इस मामले में बीडीओ गौरव कुमार ने त्यागपत्र की जानकारी होने से इनकार किया है। बीडीओ कार्यालय के अनुसार, 16 जुलाई को जारी एक स्पष्टीकरण पत्र में जांच के दौरान उपस्थिति पंजी उपलब्ध न होने और लिपिक के अनुपस्थित रहने पर उनसे जवाब मांगा गया था। बीडीओ का यह बयान और लिपिक के आरोप, दोनों के बीच विरोधाभास की स्थिति पैदा करते हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
आगे की राह
इस घटना ने प्रखंड कार्यालय के भीतर के माहौल और कर्मचारियों के प्रति अधिकारियों के रवैये पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक ओर जहां एक कर्मचारी अपनी पत्नी की गंभीर बीमारी के बावजूद अवकाश न मिलने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी को त्यागपत्र की जानकारी न होने की बात कही जा रही है। इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले पर क्या संज्ञान लेता है और पीड़ित कर्मचारी को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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