मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद देवघर एम्स में फायर ऑडिट: सुरक्षा में मिली खामियों को दूर करने का निर्देश
अग्निशमन विभाग की सख्ती: एम्स देवघर में सुरक्षा मानकों की जांच
मुजफ्फरपुर में हाल ही में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इसी कड़ी में देवघर अग्निशमन विभाग ने सतर्कता बरतते हुए एम्स (AIIMS) देवघर परिसर में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया। अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल प्रसाद यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने संस्थान के 11 महत्वपूर्ण भवनों का गहन निरीक्षण किया।
किन भवनों की हुई जांच?
निरीक्षण के दौरान टीम ने एम्स के विभिन्न ब्लॉकों की अग्नि सुरक्षा प्रणाली को परखा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अस्पताल के ब्लॉक-ए, बी और डी
- आयुष ब्लॉक और एकेडमिक बिल्डिंग
- छात्रों के लिए बॉयज, गर्ल्स और पीजी हॉस्टल
- नर्स हॉस्टल
- टाइप-2 से लेकर टाइप-5 तक की रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स
जांच में अधिकांश भवनों में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तो मिले, लेकिन कुछ तकनीकी कमियां भी सामने आईं। विभाग ने इन खामियों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने का निर्देश दिया है।
आधुनिक तकनीक और सुरक्षा की अनिवार्यता
अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल उपकरण लगा देना ही पर्याप्त नहीं है। भवनों में ‘ऑटोमैटिक सप्रेशन सिस्टम’ होना अनिवार्य है, जो 68 डिग्री सेल्सियस तापमान पहुंचते ही खुद सक्रिय हो जाता है। यह प्रणाली साल के 365 दिन 24 घंटे सक्रिय रहकर आग को शुरुआती चरण में ही काबू करने में सक्षम है।
पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बड़े संस्थानों में मॉड्यूलर फायर स्टेशन, निकासी के स्पष्ट मार्ग और आपातकालीन अलार्म सिस्टम का होना अनिवार्य है। साथ ही, समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी है ताकि किसी भी आपात स्थिति में कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी त्वरित प्रतिक्रिया दे सकें।
आम जनता और संस्थानों के लिए चेतावनी
अग्निशमन विभाग ने जिले के सभी होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स संचालकों को सख्त चेतावनी दी है। सुरक्षा मानकों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की रक्षा का सवाल है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में जिले भर में ऑडिट और जागरूकता अभियान जारी रहेंगे। सुरक्षा उपकरणों का नियमित रख-रखाव और परीक्षण सुनिश्चित करना हर संस्थान की जिम्मेदारी है।
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