मुजफ्फरपुर की सोनारपट्टी में मंदी की मार: गहनों की घटती मांग से कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
सोनारपट्टी में पसरा सन्नाटा
उत्तर बिहार की सबसे पुरानी और प्रमुख आभूषण मंडी, मुजफ्फरपुर की सोनारपट्टी इन दिनों एक कठिन दौर से गुजर रही है। टावर चौक से लेकर पुराने बाजार तक फैली यह ऐतिहासिक मंडी, जो कभी ग्राहकों की चहल-पहल से गुलजार रहती थी, आज कारोबार में भारी सुस्ती का सामना कर रही है। 1940 के दशक से स्थापित इस बाजार में 250 से अधिक दुकानें और 300 से ज्यादा कारीगर आजीविका के लिए निर्भर हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने यहां के पूरे व्यापारिक चक्र को प्रभावित कर दिया है।
पीएम की अपील और बदलता बाजार
वैश्विक स्तर पर उपजे तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोने-चांदी की खरीद में संयम बरतने की अपील का असर स्थानीय बाजार पर साफ दिख रहा है। सर्राफा दुकानदारों के अनुसार, लोग अब केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही खरीदारी कर रहे हैं। जो ग्राहक पहले शौकिया तौर पर आभूषण खरीदते थे, उन्होंने फिलहाल अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। खरीदारी की मात्रा में भी भारी गिरावट आई है; जो लोग पहले 10 ग्राम सोना खरीदते थे, वे अब 5 ग्राम तक सीमित हो गए हैं।
कारीगरों की व्यथा
इस मंदी की सबसे बड़ी मार उन कारीगरों पर पड़ी है जो दैनिक ऑर्डर पर अपना घर चलाते हैं। चार पीढ़ियों से इस पेशे से जुड़े कारीगरों का कहना है कि उन्होंने अपने करियर में ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी। लग्न और त्योहारों के सीजन में भी बाजार में ‘भदवारी’ जैसा सन्नाटा पसरा रहता है।
- काम का अभाव: नए गहनों के ऑर्डर न मिलने से कारीगरों के पास खाली बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
- आर्थिक तंगी: नियमित आय न होने के कारण कई परिवारों के सामने दैनिक खर्च चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
- पेशा छोड़ने की मजबूरी: काम की कमी से हताश होकर कई कारीगर अब वैकल्पिक रोजगार की तलाश करने पर मजबूर हैं।
भविष्य को लेकर चिंता
सोनारपट्टी का वार्षिक कारोबार ₹1000 करोड़ से अधिक का माना जाता है, लेकिन वर्तमान में मांग में आई कमी ने पूरे चेन को हिलाकर रख दिया है। दुकानदारों और कारीगरों का मानना है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है। हालांकि, बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि आने वाले समय में शादियों के सीजन के साथ कारोबार में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल कारीगरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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