मुजफ्फरपुर में औद्योगिक क्रांति की तैयारी: पारू और मोतीपुर में डीएम ने परखीं विकास की संभावनाएं
औद्योगिक हब बनने की राह पर मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर जिले के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की कवायद तेज हो गई है। जिलाधिकारी कुमार गौरव ने शनिवार को पारू और मोतीपुर प्रखंडों का दौरा कर प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने न केवल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए, बल्कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना।
पारू में 700 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र का खाका
पारू में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र जिले के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। प्रशासन की योजना के अनुसार, यहाँ पांच अलग-अलग मौजों में कुल 700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसमें चांदपुर चिउटारा, चतुरपट्टी, भोजपट्टी, हरपुर कपरफोरा और विशुनपुर सरैया शामिल हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और रैयतों को नियमानुसार मुआवजा मिलना सुनिश्चित किया जाए।
इस औद्योगिक क्षेत्र को पटना-बेतिया फोरलेन से जोड़ने का प्रस्ताव पहले ही एनएचएआई को भेजा जा चुका है। इससे भविष्य में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की राह आसान होगी। प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
मोतीपुर में लेदर फैक्ट्री और जनसुनवाई
पारू के बाद जिलाधिकारी ने मोतीपुर प्रखंड कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद आम लोगों की फरियाद सुनी और दाखिल-खारिज जैसे लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
इसके बाद वे महवल स्थित औद्योगिक क्षेत्र पहुंचे, जहां 600 एकड़ की प्रस्तावित परियोजना और लेदर फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने सीमेंट फैक्ट्री के स्थान पर अन्य उद्योगों को प्राथमिकता देने की मांग की। जिलाधिकारी ने इस विषय पर चर्चा के लिए उन्हें जिला मुख्यालय आमंत्रित किया है।
विकास की नई इबारत
जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत मुजफ्फरपुर को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पारू और मोतीपुर की ये परियोजनाएं जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों में उद्योगों के लिए एक अनुकूल और सहायक वातावरण तैयार किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हों।
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