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मुजफ्फरपुर में जनवादी कवियों की कविताओं से गूंजा साहित्य-संवाद

मुजफ्फरपुर में रविवार को ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ फ्यूचर’ द्वारा आयोजित साहित्य-संवाद कार्यक्रम जनवादी कवियों की कविताओं के नाम रहा। नयाटोला स्थित कार्यक्रम स्थल पर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और वरिष्ठ साहित्यकारों ने उन कवियों को उनकी रचनाओं के माध्यम से याद किया, जिन्होंने अपनी लेखनी से जनचेतना को जगाने का काम किया। इस अवसर पर कई जानी-मानी हस्तियों ने कविताओं का पाठ किया और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता शेफाली ने शरद जोशी की व्यंग्य कविता के पाठ से किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष की कोख से जन्मी कविताएं केवल नारेबाजी नहीं होतीं, बल्कि वे संघर्ष चेतना को जीवित रखती हैं। शेफाली ने कहा कि हम उन कवियों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेंगे, जिन्होंने संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में चेतना फैलाई। उन्होंने प्रेम और क्रांति के अटूट संबंध को रेखांकित करते हुए कुंवर नारायण की कविता ‘एक अजीब सी मुश्किल है’ से अपने काव्य पाठ की शुरुआत की। इसके बाद युवा कलाकार हेमंत ने अपनी कविता ‘मरना’ का पाठ कर प्रतिरोध की कविता के उत्सव का आगाज किया।

कार्यक्रम में धूमिल, निराला, नागार्जुन, पाश, शरद जोशी, कुंवर नारायण, दुष्यंत, नरेश सक्सेना, साहिर लुधियानवी, मुक्तिबोध, गोपाल सिंह नेपाली, केदारनाथ अग्रवाल, उदय प्रकाश, हेमंत, कुमारेन्द्र पारसनाथ सिंह, मोहित, यादवचंद्र पांडेय, शिवेंद्र कुमार मौर्य और बैजू जैसे जनवादी कवियों की कविताओं का पाठ किया गया। साहित्यकार नंदकिशोर नंदन, युवा कवि मोहित, शिव कुमार, सुजीत, लवकेश, ऋषि राज, अभिषेक, रंजन, अमरेश, नीतेश, रणधीर और रंगकर्मी बैजू व अनुभव ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

सत्यम जी ने कवि शिवेंद्र कुमार मौर्य का लिखा गीत ‘सखी देशवा में कुछ ना ही ठीक हॉट बा’ सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता शाहिद कमल, अवधेश कुमार, प्राध्यापक शिवेंद्र कुमार मौर्य, रणजीत दिनकर, वरिष्ठ कवि नंदकिशोर नंदन, ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ फ्यूचर’ की ट्रस्टी मनोरमा नंदन और पुष्पम देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, छात्र-छात्राएं और प्राध्यापक भी इस साहित्यिक आयोजन का हिस्सा बने, जिसने मुजफ्फरपुर में साहित्य और जनचेतना के संगम का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।


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