गायघाट में बाढ़ का कहर: दो पंचायतें जलमग्न, सैकड़ों परिवार विस्थापित, बांध मरम्मत में देरी से बढ़ा संकट
मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड की कांटा पीरौंछा उत्तरी और दक्षिणी पंचायतें इस समय बाढ़ की भीषण चपेट में हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से इन क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, और कई परिवार पानी से घिर गए हैं। विशेष रूप से कांटा पीरौंछा दक्षिणी पंचायत के पांच वार्डों के निवासी विस्थापित होने को मजबूर हो गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की तैयारी शुरू कर दी है।
बाढ़ के पानी ने ग्रामीण सड़कों को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे श्याम सिंह के मकान पर कटाव का खतरा मंडरा रहा है। पानी की तेज धारा से हो रहे कटाव के कारण मकान की दीवार तक पानी पहुंच गया है। स्थानीय ग्रामीण अपनी सीमित संसाधनों से, जैसे पॉलीथिन और लोहे की चादरों का उपयोग करके, कटाव को रोकने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सोमवार दोपहर जल संसाधन विभाग के एसडीओ ज्ञान गौरव और जेई प्रियांश गोईत ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से संवेदक को बचाव एवं सुरक्षा कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
बांध मरम्मत में देरी बनी बड़ी वजह
कांटा पीरौंछा दक्षिणी पंचायत के महुआरा और तरबन्ना में टूटे बांधों की मरम्मत न होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। पंचायत समिति सदस्य रीना देवी ने बताया कि वार्ड संख्या 1, 2, 3, 7 और 9 पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। किसानों की धान की फसलें भी बाढ़ के पानी में डूब गई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
रीना देवी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष की बाढ़ में भी पूरी पंचायत को भारी क्षति हुई थी, जिसमें कई सड़कें टूट गई थीं जिनकी बाद में मरम्मत की गई। हालांकि, क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत आज तक नहीं हो पाई है। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग दो महीने पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सह सांसद राजभूषण चौधरी ने टूटे बांध का निरीक्षण किया था और जल्द मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश, अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
बाढ़ का पानी लगातार अन्य वार्डों की ओर भी बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। अंचलाधिकारी पुष्प राज ने आश्वासन दिया है कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कांटा पीरौंछा उत्तरी पंचायत में लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से इस आपदा से निपटने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बांधों की स्थायी मरम्मत न होना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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