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मुजफ्फरपुर के 1000 से अधिक स्कूलों में अब सिर्फ दो शिक्षक: शिक्षा विभाग के नए मानक पर मचा घमासान

शिक्षा विभाग का नया फरमान: छात्र-शिक्षक अनुपात पर स्कूलों का पुनर्गठन

मुजफ्फरपुर जिले के प्राथमिक शिक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, अब जिले के एक हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई का जिम्मा केवल दो शिक्षकों के कंधों पर होगा। यह निर्णय छात्र-शिक्षक अनुपात को तर्कसंगत बनाने (रेशनलाइजेशन) की प्रक्रिया के तहत लिया गया है।

क्या है नया नियम?

विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक, जिन प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की कुल संख्या 60 या उससे कम है, वहां केवल दो शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इन दो शिक्षकों में से एक को प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। जिले के सभी प्रखंडों से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की गई है, जिसके बाद से ही शिक्षक संगठनों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

शिक्षकों की चिंता और जमीनी हकीकत

शिक्षक संघों का तर्क है कि भले ही नामांकित बच्चों की संख्या कम हो, लेकिन पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना शैक्षणिक गुणवत्ता के लिहाज से व्यावहारिक नहीं है। जिले में लगभग डेढ़ हजार प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चों की संख्या 60 से काफी कम है।

आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है:

  • गायघाट के प्राथमिक विद्यालय कन्या में 57 और दुबियाही लक्ष्मी में 50 बच्चे नामांकित हैं।
  • प्राथमिक विद्यालय सूर्य नयाटोला में 51, जारंगडीह हरिजन टोला में 56 और हरकौली मुसहर में मात्र 40 बच्चे हैं।
  • मीनापुर के प्राथमिक विद्यालय हरिजन में 35 और बालिका विद्यालय में 38 बच्चे ही पंजीकृत हैं।
  • जिले में ऐसे भी कई स्कूल हैं जहां बच्चों की संख्या 20 से 30 के बीच है, जैसे शिवदहा में 13 और रामनगर मुसहर में 20 बच्चे।

आगे की राह

वर्तमान में कई ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चों की संख्या कम होने के बावजूद 4 से 6 शिक्षक कार्यरत हैं। रेशनलाइजेशन प्रक्रिया के तहत, इन अतिरिक्त शिक्षकों को उन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है। हालांकि, यह बदलाव जिले के शैक्षणिक ढांचे को किस हद तक प्रभावित करेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, शिक्षक और विभाग के बीच इस नए मानक को लेकर खींचतान जारी है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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