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बिहार संग्रहालय में बच्चों की रचनात्मकता का उत्सव: छह दिवसीय समर कैंप का शानदार समापन

हुनर को मिली नई उड़ान

बिहार संग्रहालय में आयोजित छह दिवसीय समर कैंप का रविवार को भव्य समापन हुआ। इस रचनात्मक आयोजन में मुजफ्फरपुर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 300 बच्चों ने हिस्सा लिया। इन छह दिनों में बच्चों ने न केवल कला की बारीकियां सीखीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं को धरातल पर उतारने का हुनर भी विकसित किया।

कला और साहित्य का अनूठा संगम

समर कैंप के दौरान तीन प्रमुख विधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें टेराकोटा, मास्क मेकिंग और कहानी लेखन शामिल थे। कार्यशालाओं का विवरण इस प्रकार है:

  • टेराकोटा कला: राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कलाकार पिंटू प्रसाद के मार्गदर्शन में बच्चों ने मिट्टी को आकार देना सीखा। उन्होंने मिट्टी से दीये, मूर्तियां और विभिन्न जीव-जंतुओं की आकृतियां बनाकर अपनी कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।
  • कहानी लेखन: कथाकार डॉ. ध्रुव कुमार और मयूरी ने बच्चों को सृजनात्मक लेखन की बारीकियां समझाईं। लघुकथा लेखन के गुर सीखकर बच्चों ने अपनी लेखनी को धार दी।
  • मास्क मेकिंग: हेमंत कुमार ने बच्चों को रंग-बिरंगे और आकर्षक मास्क बनाने का प्रशिक्षण दिया, जिसमें बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का भरपूर उपयोग किया।

प्रमाण-पत्रों से सम्मानित हुए नन्हे कलाकार

समापन समारोह में बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रही। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। वहीं, कक्षा 5 से 8 तक के बच्चों को पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास, अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा, डॉ. सुनील कुमार झा, डॉ. रणवीर सिंह राजपूत और कलाकार मनीषा झा ने सम्मानित किया।

इस अवसर पर पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास ने कहा कि बिहार संग्रहालय का यह प्रयास बच्चों में कला के प्रति रुचि जगाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। प्रतिभागियों ने भी इस अनुभव को बेहद उपयोगी बताया। छात्रा नवनीति शर्मा ने साझा किया कि कहानी लेखन कार्यशाला ने उनके लेखन कौशल को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई है। यह आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें पारंपरिक कलाओं से जोड़ने का एक सफल प्रयास साबित हुआ।


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