बागमती का कहर जारी: कांटा हाईस्कूल के पास सड़क पर चढ़ा पानी, आवागमन ठप; मधुरपट्टी में भी संकट गहराया
मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड में बागमती नदी का जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टूटे हुए सुरक्षा बांध के कारण कांटा गांव एक बार फिर जलमग्न हो गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुधवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब राष्ट्रीय राजमार्ग 27 को पूसा-समस्तीपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर कांटा हाईस्कूल के पास पानी चढ़ गया। इस कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कांटा गांव के चारों ओर पानी फैलने से ग्रामीणों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। खेतों से लेकर घरों तक पानी घुसने से लोग भयभीत हैं। वहीं, मधुरपट्टी जाने वाली सड़क पर पिछले एक सप्ताह से पानी जमा है, जिससे यह मार्ग भी लगभग अवरुद्ध हो चुका है। गांव में स्थित सरकारी विद्यालयों तक पहुंचने में शिक्षकों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई शिक्षक पानी में घुसकर या लंबे चक्कर लगाकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं।
मधुरपट्टी में ध्वस्त सड़कें, शिक्षकों की बढ़ी चिंता
मधुरपट्टी की स्थिति और भी चिंताजनक है। बेनीबाद-महुआरा गांव से होकर मधुरपट्टी जाने वाली पक्की सड़क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। कई स्थानों पर सड़क टूट जाने के कारण पानी की तेज धार बह रही है, जिससे पैदल आवागमन भी अत्यंत जोखिम भरा हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह किसी चुनौती से कम नहीं है।
मधुरपट्टी उत्क्रमित मध्य विद्यालय के शिक्षकों ने बुधवार को प्रखंड प्रशासन से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। प्रभारी प्रधानाध्यापक विद्यानंद यादव, शिक्षक लालबाबू राय, राजेश कुमार, शशांक शेखर, अर्चना कुमारी और शत्रुघ्न कुमार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए केवल एक ही सड़क है। बाढ़ का पानी चढ़ने और सड़क के टूट जाने से विद्यालय पहुंचना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नदी में पानी की तेज धार होने के कारण नाव से आवागमन करना भी सुरक्षित नहीं है, जिससे शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए विद्यालय आना-जाना खतरे से खाली नहीं है।
स्थानीय प्रशासन से ग्रामीणों और शिक्षकों ने जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है ताकि सामान्य जनजीवन और शैक्षणिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट सकें।
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