मुजफ्फरपुर के स्कूलों में गूंजेगी तबले की थाप, शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
मुजफ्फरपुर जिले के लखनौर प्रखंड में सरकारी विद्यालयों के पठन-पाठन को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बच्चों को तबले की थाप पर शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलेगा। मंगलवार को बीआरसी लखनौर में प्रखंड के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को तबला, प्रगति पत्रक और रजिस्टर उपलब्ध कराए गए।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शिव नारायण सुमन ने इस पहल की शुरुआत करते हुए कहा कि तबले का उपयोग केवल स्कूल की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे पठन-पाठन का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि बच्चे आवश्यकतानुसार तबले का उपयोग करें। उनका मानना है कि इससे बच्चों में संगीत के प्रति रुचि जागृत होगी और वे पढ़ाई को अधिक उत्साह के साथ ग्रहण कर पाएंगे।
शिक्षा में संगीत का महत्व
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तबले जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग न केवल बच्चों की एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि उनकी रचनात्मकता और सुनने की क्षमता को भी विकसित करता है। शिव नारायण सुमन ने इस बात पर जोर दिया कि तबले के माध्यम से पठन-पाठन को रुचिकर बनाने में मदद मिलेगी, जिससे बच्चों का स्कूलों में ठहराव सुनिश्चित होगा। यह पहल बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने और उनकी उपस्थिति में सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगी।
लखनौर प्रखंड में कुल 68 प्राथमिक विद्यालय और 39 मध्य विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों को तबले उपलब्ध कराए गए हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि इस कदम से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का माहौल और अधिक जीवंत बनेगा।
इंद्र पूजनोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
इसी बीच, जयनगर में कमला नदी के किनारे कमला रोड में आयोजित होने वाले 12 दिवसीय इंद्र पूजनोत्सव की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। इस भव्य आयोजन का विधिवत उद्घाटन मंगलवार शाम को किया जाएगा। पूजनोत्सव के लिए एक आकर्षक पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस आयोजन में सीमावर्ती नेपाल सहित प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। यह पूजनोत्सव क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
शिक्षा और संस्कृति के इन दोनों महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से मुजफ्फरपुर जिले में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। जहां एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजने का प्रयास किया जा रहा है।
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