मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: स्वास्थ्य विभाग का अजीब तर्क, ‘जीवन रक्षक प्रणाली हटने से हुई मरीजों की मौत’
प्रसाद अस्पताल हादसे पर स्वास्थ्य विभाग की सफाई पर उठे सवाल
मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब स्वास्थ्य विभाग का एक हैरान करने वाला जवाब सामने आया है। विधान परिषद में जब इस संवेदनशील मुद्दे पर सवाल उठाए गए, तो जिला स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में दलील दी कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की मौत आग लगने के कारण नहीं, बल्कि जीवन रक्षक प्रणाली (लाइफ सपोर्ट सिस्टम) के बाधित होने और मरीजों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के दौरान हुई। विभाग का कहना है कि शॉर्ट सर्किट से उठे धुएं के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
विधान परिषद सदस्य राशि यादव ने इस मामले को सदन में उठाते हुए तीखे सवाल किए थे। उन्होंने न केवल मौतों के कारणों की समीक्षा के लिए ‘मोर्टलिटी रिव्यू कमेटी’ के गठन में देरी पर सवाल उठाए, बल्कि मृतकों के परिजनों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे और सार्वजनिक माफी की मांग भी की। इन सवालों के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने लीपापोती का प्रयास करते हुए कहा कि मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई बड़ी खामियां
इधर, सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक पड़ताल में अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर की है। जांच में दर्जनभर से अधिक बिंदुओं पर गड़बड़ी पाई गई है, जो इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार मानी जा रही हैं:
- अस्पताल के बिजली के तारों में गंभीर खामियां।
- अग्निशमन यंत्रों का सही तरीके से काम न करना।
- अस्पताल में रैंप जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
- आग बुझाने के लिए गलत गैस (एबीसी गैस) का इस्तेमाल, जिससे आईसीयू में धुआं और अधिक फैल गया।
- ऑक्सीजन पाइपलाइन में लीकेज के कारण चिंगारी भड़कने की आशंका।
फिलहाल, जांच टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे जल्द ही जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। इस अग्निकांड में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है, और विभाग के इस ‘अजीबोगरीब’ बचाव ने पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।
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