मुजफ्फरपुर में सड़क मरम्मत का ‘कागजी खेल’: रिपोर्ट में काम पूरा, हकीकत में गड्ढों का अंबार
सड़क की बदहाली और सरकारी दावों के बीच फंसा मीनापुर
मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड में सहिला-रामपुर-नर्मा सड़क की दुर्दशा ने अब एक गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उपेक्षा झेल रही इस सड़क को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट पर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमरेन्द्र कुमार ने विभाग के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला बताया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमरेन्द्र कुमार ने सहयोग पोर्टल पर इस सड़क की जर्जर स्थिति की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में स्पष्ट किया गया था कि पिछले ढाई वर्षों से इस सड़क पर कोई भी अनुरक्षण कार्य नहीं हुआ है, जिससे आम लोगों का चलना दूभर हो गया है। इस शिकायत के जवाब में ग्रामीण कार्य विभाग ने जिलाधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दावा किया गया कि सड़क पंचवर्षीय अनुरक्षण योजना के तहत है और मरम्मत का कार्य अंतिम चरण में है, जिसे एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी रिपोर्ट
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग द्वारा भेजी गई यह रिपोर्ट पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है। स्थल निरीक्षण के दौरान सड़क पर मरम्मत का कोई भी प्रभावी काम नजर नहीं आया। अमरेन्द्र कुमार ने रामपुर हरि थाने में आवेदन देकर मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि विभाग की रिपोर्ट गलत साबित होती है, तो संबंधित कार्यपालक अभियंता और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
विभाग का पक्ष
दूसरी ओर, ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता रंजीत कुमार मंडल ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सड़क के मेंटेनेंस का काम चल रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मरम्मत कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा ताकि स्थानीय निवासियों को आवागमन में कोई कठिनाई न हो।
आगे की राह
यह मामला अब केवल एक सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अमरेन्द्र कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि कागजों में काम दिखाकर सरकारी राशि का गबन करने की कोशिश की गई, तो वे इस कानूनी लड़ाई को न्यायालय तक ले जाएंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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