मुजफ्फरपुर कोर्ट में डिजिटल क्रांति: ‘न्याय श्रुति’ एप से अब घर बैठे होगी गवाही
न्यायिक प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
मुजफ्फरपुर की अदालती कार्यवाही अब पूरी तरह से डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रही है। भारतीय न्याय संहिता के तहत अदालती सुनवाई को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए ‘न्याय श्रुति’ एप को अपनाया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत अब गवाहों, पुलिस अधिकारियों और डॉक्टरों को अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
क्या है न्याय श्रुति एप?
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विकसित यह एप न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए तैयार किया गया है। दो साल पहले इसकी शुरुआत के बाद से ही देश के कई राज्यों में इसे सफलतापूर्वक लागू किया गया है। हाल ही में बिहार को भी इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ दिया गया है, जिसके बाद अब मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय में भी इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
प्रशिक्षण का दौर शुरू
इस नई तकनीक को सुचारू रूप से चलाने के लिए मुजफ्फरपुर में विशेष प्रशिक्षण सत्र शुरू हो चुके हैं। गृह विभाग के विशेषज्ञों द्वारा लोक अभियोजकों, पुलिस अधिकारियों और कोर्ट के तकनीकी कर्मचारियों को इस एप के संचालन की बारीकियां समझाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि यह एप पूरी तरह से सुरक्षित है और इसे भारतीय विशेषज्ञों द्वारा ही तैयार किया गया है।
सुरक्षा और गोपनीयता
इस एप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुरक्षा प्रणाली है। इसे कोई भी अनधिकृत व्यक्ति एक्सेस नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति इसे अपने फोन में डाउनलोड भी कर लेता है, तो भी संबंधित अदालत से प्राप्त लिंक के बिना वह कार्यवाही में शामिल नहीं हो पाएगा। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को भी कम करेगी।
न्यायिक कामकाज में तेजी
कानूनी जानकारों का मानना है कि वर्चुअल मोड में गवाही होने से मुकदमों के निस्तारण में तेजी आएगी। अक्सर गवाहों के कोर्ट न पहुंच पाने के कारण सुनवाई टल जाती थी, लेकिन अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही होने से न्याय प्रक्रिया में देरी की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी। आने वाले कुछ दिनों में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इस व्यवस्था को पूरी तरह से क्रियान्वित कर दिया जाएगा।
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