मुजफ्फरपुर: मरीजों की जान से खिलवाड़, सरकारी एंबुलेंस में अवैध रूप से लगी सीएनजी किट
मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही
मुजफ्फरपुर में सरकारी एंबुलेंस सेवाओं को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिले में संचालित 102 और 108 एंबुलेंस में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के सीएनजी किट लगाकर उनका संचालन किया जा रहा था। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
कहां-कहां चल रही थीं अवैध एंबुलेंस?
प्रारंभिक जांच में जिले की करीब 10 एंबुलेंस की पहचान की गई है, जिनमें अवैध रूप से सीएनजी किट फिट की गई थी। इनमें सदर अस्पताल परिसर के अलावा श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH), मुशहरी, मोतीपुर और कटरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एंबुलेंस भी शामिल हैं। ये वाहन पिछले छह महीनों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और वीआईपी ड्यूटी में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
सुरक्षा के लिए क्यों खतरनाक है सीएनजी?
विशेषज्ञों के अनुसार, एंबुलेंस में सीएनजी किट का उपयोग करना मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- आग का खतरा: एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर मौजूद होते हैं। सीएनजी से गैस रिसाव होने पर एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।
- मरीजों की सेहत पर असर: सीएनजी लीक होने पर केबिन में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जो वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों के लिए घातक है।
- तकनीकी खामियां: सीएनजी किट के भारी वजन से गाड़ी का संतुलन बिगड़ता है। साथ ही, डीजल-पेट्रोल के मुकाबले पिक-अप कम होने से आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस की गति प्रभावित होती है।
- ईंधन की समस्या: सीएनजी पंपों पर लंबी कतारों के कारण एंबुलेंस की तत्परता (रेडी-टू-मूव) पर बुरा असर पड़ता है।
क्या है विभाग का रुख?
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) सलीम जावेद ने इस बात की पुष्टि की है कि कुछ एंबुलेंस में सीएनजी का उपयोग किया जा रहा था। संबंधित निजी एजेंसी से इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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