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मुजफ्फरपुर में फर्जी आंकड़ों पर बवाल: पारू थानेदार पर निलंबन की तलवार, दो अन्य को भी फटकार

मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के एडीजी पारस नाथ की ऑनलाइन क्राइम समीक्षा बैठक के दौरान पारू थानेदार आशुतोष कुमार शुक्ला की गंभीर लापरवाही सामने आई। फर्जी आंकड़े पेश करने और बैठक के दौरान अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में उन पर निलंबन की तलवार लटक गई है। एडीजी के निर्देश पर एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र ने थानेदार से निलंबन के बिंदु पर स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, करजा और मोतीपुर थानेदारों को भी संतोषजनक प्रदर्शन न करने पर कड़ी फटकार लगाई गई है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एडीजी तिरहुत रेंज के सभी जिलों के थानेदारों के साथ लंबित मामलों और गिरफ्तारी की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान पारू थानेदार आशुतोष कुमार शुक्ला ने अपने क्षेत्र से जुड़े मामलों का ब्योरा पेश किया। जब एडीजी ने प्रस्तुत आंकड़ों का मिलान कराया तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि थानेदार ने वर्ष 2024 के आंकड़े पेश किए थे, जबकि बैठक 2022 में हो रही थी। यानी, करीब दो साल पुराना डेटा प्रस्तुत किया गया था। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एडीजी ने कड़ी नाराजगी जताई और एसएसपी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

दोहरी चूक: फर्जी आंकड़े और अनुशासनहीनता

पारू थानेदार से सिर्फ आंकड़ों की गड़बड़ी ही नहीं हुई, बल्कि एक और बड़ी चूक सामने आई। बैठक के दौरान उनका मोबाइल माइक ऑन रह गया और इसी दौरान उनके द्वारा कुछ अनुशासनहीनता वाली बातें कही जाने लगीं। यह आवाज ऑनलाइन बैठक में जुड़े एडीजी समेत जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गई, जिससे बैठक का अनुशासन भंग हो गया। इस घटना के बाद एडीजी ने तत्काल एसएसपी को कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसके बाद थानेदार से निलंबन के बिंदु पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

एसएसपी की ओर से जारी स्पष्टीकरण में थानेदार से जवाब मांगा गया है। पुलिस महकमे में इसे एक गंभीर अनुशासनात्मक मामला माना जा रहा है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो निलंबन की कार्रवाई तय मानी जा रही है।

अन्य थानेदारों पर भी गिरी गाज

एडीजी पारस नाथ ने बताया कि राज्य के उन शीर्ष पांच जिलों में जहां लंबित मामलों की संख्या अधिक है, वहां के थानेदारों के साथ क्राइम समीक्षा की जा रही है। मुजफ्फरपुर की समीक्षा के दौरान दो अन्य थानेदारों, करजा और मोतीपुर के प्रदर्शन को भी संतोषजनक नहीं पाया गया। आर्म्स एक्ट, शराब कांड, वारंट और कुर्की से जुड़े मामलों में धीमी प्रगति पर अधिकारियों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। एडीजी ने संबंधित थानेदारों को 48 घंटे के भीतर स्थिति में सुधार कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इस कार्रवाई के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में लंबित मामलों के निपटारे और गिरफ्तारी की कार्रवाई को लेकर दबाव काफी बढ़ गया है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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