मुजफ्फरपुर से पकड़ा गया भोपाल ATM धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड, बैंककर्मी से सीखी थी चोरी की तरकीब
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक बड़े अंतरराज्यीय एटीएम धोखाधड़ी गिरोह के मास्टरमाइंड अभिषेक कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है। भोपाल पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए उस गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने मध्य प्रदेश की राजधानी में भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी की थी। अभिषेक को ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाया गया है, जहाँ उससे गहन पूछताछ जारी है।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने एटीएम के लॉक सिस्टम से छेड़छाड़ करने की तरकीब बिहार के ही एक निजी बैंक कर्मचारी से सीखी थी। गिरफ्तार आरोपी अभिषेक कुमार सिंह गिरोह के अन्य सदस्यों को इस विशेष तकनीक का प्रशिक्षण देता था और उन्हें एटीएम के लॉक सिस्टम को हैक करने के लिए मास्टर-की भी उपलब्ध कराता था। अब पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि ये मास्टर-की किसने बनाई थी और इस गिरोह के तार और किन-किन लोगों से जुड़े हैं।
गिरोह का सरगना और कार्यप्रणाली
पुलिस के अनुसार, इस अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना बिहार के गया का रहने वाला विपुल कुमार उर्फ सोनू है। विपुल भोपाल के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज का पूर्व छात्र रह चुका है। उसी ने बिहार से अपने साथियों को भोपाल बुलाया और शाहपुरा, कोलार, अशोका गार्डन सहित कई इलाकों में एसबीआई के एटीएम को निशाना बनाया।
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। इसके सदस्य विभिन्न पेशों से जुड़े थे, जिनमें इंजीनियरिंग के छात्र, होटल संचालक और मजदूर शामिल थे। अलग-अलग पृष्ठभूमि के होने के कारण उन पर आसानी से संदेह नहीं होता था। पिछले 10 से 15 दिनों के दौरान इस गिरोह ने लगभग 11 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
धोखाधड़ी का तरीका
शाहपुरा थाना प्रभारी संतोष मसराम ने बताया कि आरोपी मास्टर-की की मदद से एटीएम के लॉक सिस्टम में छेड़छाड़ करते थे। जब कोई ग्राहक पैसे निकालने आता और मशीन से रकम नहीं निकलती, तो ग्राहक के जाने के बाद आरोपी प्लास्टिक स्ट्रिप और अन्य उपकरणों का उपयोग करके फंसी हुई रकम निकाल लेते थे। पुलिस को कई एटीएम के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिनके आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस हिरासत में अभिषेक कुमार सिंह लगातार गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। वह बार-बार अपना पता और व्यवसाय बदल कर बता रहा था। कभी उसने खुद को होटल व्यवसायी बताया, तो कभी अन्य गलत जानकारी देकर जांच भटकाने का प्रयास किया। हालांकि, कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने छपरा बाईपास में एक होटल संचालित करने की बात स्वीकार की है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और गिरोह के सभी सदस्यों को पकड़ने का प्रयास कर रही है।
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