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मुजफ्फरपुर: अपनों को खोने का दर्द और मुआवजे की फाइलों में उलझी उम्मीदें

मुआवजे के इंतजार में 20 परिवार

मुजफ्फरपुर में प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हुए 20 परिवारों के लिए सरकारी मुआवजा अब भी एक दूर का सपना बना हुआ है। अपनों को खोने का गम झेल रहे ये परिवार अब दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से जून के बीच जिले में कुल 72 लोगों की जान प्राकृतिक आपदाओं में गई है। इनमें से 52 परिवारों को 2.08 करोड़ रुपये की सहायता राशि मिल चुकी है, लेकिन बाकी 20 परिवारों की फाइलें अभी भी प्रशासनिक पेचीदगियों में फंसी हुई हैं।

क्यों अटकी है सहायता राशि?

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मुआवजे की राह में सबसे बड़ी बाधा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का न मिलना है। लंबित 20 मामलों में से 8 मामले ऐसे हैं जिनमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक आपदा विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। ये अधिकतर मामले डूबने और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े हैं। हालांकि पुलिस ने इन घटनाओं में यूडी केस दर्ज किया है, लेकिन रिपोर्ट के अभाव में मुआवजे की प्रक्रिया ठप पड़ी है।

प्रशासनिक सुस्ती और परिवारों का संघर्ष

बाकी 12 परिवारों की फाइलें जिला कार्यालय से पटना स्थित आपदा प्रबंधन विभाग तक भेजी गई हैं, लेकिन वहां से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। इस देरी के कारण 80 लाख रुपये से अधिक की राशि लंबित है। विभाग की ओर से बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दोहरी मार झेल रहे पीड़ित

जिन परिवारों ने अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य को खोया है, उनके लिए यह देरी किसी दोहरी मार से कम नहीं है। आर्थिक तंगी के कारण ये लोग अब कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। आपदा के समय तुरंत मदद के सरकारी दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत यह है कि पीड़ित महीनों तक फाइलों के आगे-पीछे भटकने को विवश हैं। जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय स्वीकृति का तालमेल नहीं बैठता, तब तक इन परिवारों की उम्मीदें फाइलों के बीच ही दबी रहेंगी।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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