मुजफ्फरपुर में बच्चों की सुरक्षा खतरे में: 70% निजी स्कूल और कोचिंग बिना सुरक्षा मानकों के
मुजफ्फरपुर जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हालिया जांच में सामने आया है कि जिले के 70 प्रतिशत से अधिक निजी स्कूल और कोचिंग संस्थान बिना किसी सुरक्षा मानक के संचालित हो रहे हैं, जिससे हजारों छात्रों की जान जोखिम में है। यह स्थिति तब सामने आई है जब लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने और जिले के एक अस्पताल में हुई अग्निकांड के बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच के आदेश दिए थे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिले में पहली बार कोचिंग संस्थानों की पड़ताल की गई है। अब तक 31 कोचिंग संस्थानों की जांच हुई है, और इनमें से किसी के पास भी अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। इतना ही नहीं, जांचे गए सभी 31 कोचिंग संस्थान भवन सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें से 20 कोचिंग तो ऐसी तंग गलियों में चल रहे हैं जहां केवल एक ही प्रवेश द्वार है, जो आपात स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। किसी भी कोचिंग संस्थान का निबंधन भी नहीं मिला है।
निजी स्कूलों की स्थिति भी चिंताजनक
निजी स्कूलों की बात करें तो, 281 स्कूलों की जांच की गई, जिनमें से केवल 117 के पास ही अग्निशमन एनओसी है। 165 स्कूल अभी भी एनओसी प्रक्रियाधीन बता रहे हैं, जबकि ये स्कूल सालों से चल रहे हैं। शहरी और मुशहरी क्षेत्रों में कुल 321 निजी स्कूल हैं, जिनमें से केवल 147 स्कूलों में ही अधिकारी जांच के लिए पहुंच पाए। जांचे गए स्कूलों में से महज 30 प्रतिशत ही भवन सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे। चौंकाने वाली बात यह है कि 70 प्रतिशत स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं, जिनमें से कई केवल 5-10 कमरों में सिमटे हुए हैं।
आठ प्रखंडों में कोई जांच नहीं
जिले के आठ प्रखंड ऐसे हैं जहां अभी तक एक भी स्कूल या कोचिंग संस्थान की जांच नहीं हुई है। इनमें औराई, बंदरा, मुरौल, गायघाट, मड़वन, मीनापुर, साहेबगंज और सकरा शामिल हैं। यह दर्शाता है कि सुरक्षा जांच का दायरा अभी भी सीमित है और बड़े पैमाने पर संस्थानों की पड़ताल बाकी है।
- निबंधन: एक भी कोचिंग संस्थान निबंधित नहीं पाया गया।
- भवन सुरक्षा: किसी भी कोचिंग और 70% स्कूलों के पास स्वीकृत नक्शा नहीं है।
- प्रवेश/निकासी द्वार: अधिकांश संस्थानों में अलग प्रवेश और निकासी द्वार नहीं हैं।
- अग्निशमन: किसी भी कोचिंग में एनओसी नहीं, स्कूलों में केवल 117 के पास।
यह गंभीर स्थिति बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही को उजागर करती है और प्रशासन के लिए इन संस्थानों पर तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर देती है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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