मुजफ्फरपुर में 35 कर्मचारियों के तबादले रद्द, कमिश्नर ने DM के आदेश पर लगाई रोक, नई नीति बनाने का निर्देश
मुजफ्फरपुर में जिलाधिकारी द्वारा किए गए 35 कर्मचारियों के तबादले के आदेश को तिरहुत प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने रद्द कर दिया है। आयुक्त ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी को न केवल तबादला आदेश निरस्त करने का निर्देश दिया, बल्कि संबंधित लिपिक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और स्थानांतरण के लिए एक स्पष्ट एवं पारदर्शी नीति बनाने का भी आदेश दिया है।
बिना पूर्व अनुमोदन के तबादलों पर आपत्ति
यह मामला 28 जुलाई को मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव द्वारा जारी किए गए एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें 35 डाटा एंट्री ऑपरेटरों, सीएलआर और कार्यपालक सहायकों का तबादला किया गया था। प्रमंडलीय आयुक्त ने इस आदेश को इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि यह सक्षम अधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना जारी किया गया था। मंत्रिमंडल एवं समन्वय विभाग के संकल्प के अनुसार, नियमित स्थानांतरण या पदस्थापन वर्ष में केवल एक बार, जून माह में ही किया जा सकता है।
नियमों के मुताबिक, कार्यहित, प्रोन्नति या विशेष प्रशासनिक कारणों से जून के बाद भी तबादला संभव है, लेकिन इसके लिए सक्षम पदाधिकारी से एक स्तर ऊपर के अधिकारी का विधिवत अनुमोदन लेना अनिवार्य होता है। मुजफ्फरपुर में 28 जुलाई को जारी आदेश में इस अनिवार्य उच्च-स्तरीय अनुमोदन का पालन नहीं किया गया था, जिसे निरस्तीकरण का मुख्य आधार बनाया गया है।
लिपिक पर कार्रवाई और नई नीति का निर्देश
आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने जिलाधिकारी को उन संबंधित लिपिक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है, जिन्होंने विभागीय प्रावधानों की सही जानकारी जिलाधिकारी को नहीं दी। इसके अतिरिक्त, आयुक्त ने कर्मचारियों के तबादले को लेकर एक पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानांतरण नीति के तहत आवश्यकता पड़ने पर रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से ही कर्मियों का पदस्थापन किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी तरह की मनमानी पर रोक लग सके।
सीतामढ़ी में भी रद्द हुआ था ऐसा ही आदेश
यह पहली बार नहीं है जब प्रमंडलीय आयुक्त ने जून के बाद बिना उचित अनुमोदन के किए गए तबादला आदेश को रद्द किया हो। इससे पहले, सीतामढ़ी के जिलाधिकारी द्वारा जून के बाद किए गए ऐसे ही एक तबादला आदेश को भी प्रमंडलीय आयुक्त ने निरस्त कर दिया था। यह दर्शाता है कि प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय स्थानांतरण नियमों के पालन को लेकर गंभीर है और किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस फैसले से प्रशासन में नियमों के पालन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।



