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BRABU पीएचडी नामांकन: मेधा सूची में धांधली का आरोप, गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों ने घेरा कुलपति कार्यालय

मुजफ्फरपुर में पीएचडी नामांकन को लेकर बवाल

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब विभिन्न विषयों के गोल्ड मेडलिस्ट छात्र अपनी डिग्रियों के साथ कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि पीएचडी के लिए जारी अंतिम मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर पक्षपात किया गया है।

साक्षात्कार प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

प्रदर्शनकारी छात्रों ने इतिहास और भूगोल जैसे विषयों में साक्षात्कार प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि इंटरव्यू के दौरान मनमाने ढंग से अंक दिए गए और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। छात्रों ने यह भी दावा किया कि जो विद्यार्थी अन्य विश्वविद्यालयों में टॉपर्स रहे हैं, उन्हें यहां अयोग्य घोषित कर दिया गया, जो पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

आंदोलनकारी छात्रों ने साक्षात्कार के दौरान बरती गई प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कई बिंदु उठाए हैं:

  • साक्षात्कार के दौरान संकायाध्यक्ष (Dean) की अनिवार्य उपस्थिति का पालन नहीं किया गया।
  • आरक्षण रोस्टर के नियमों को ताक पर रखकर सूची तैयार की गई।
  • साक्षात्कार की प्रक्रिया में वीडियोग्राफी नहीं कराई गई, जिससे पारदर्शिता का अभाव रहा।
  • बोर्ड सदस्यों द्वारा शोधार्थियों के साथ अनुचित व्यवहार करने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

न्याय नहीं मिलने पर मेडल वापसी की चेतावनी

इतिहास के गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक कुमार समेत अन्य शोधार्थियों ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और मेधा सूची में सुधार नहीं किया गया, तो वे अपने गोल्ड मेडल वापस करने को मजबूर होंगे।

विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और सोशल साइंस के डीन प्रो. आरके चौधरी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे स्वयं कई साक्षात्कारों में शामिल रहे हैं। हालांकि, छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन पीएचडी नामांकन की यह प्रक्रिया अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो चुकी है।


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