मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अटपटा बंटवारा: कहीं ज़रूरत से ज़्यादा, कहीं पद खाली
मुजफ्फरपुर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या स्वीकृत पदों से कहीं अधिक है, वहीं कक्षा छह से आठ तक के मध्य विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों के पद बड़े पैमाने पर खाली पड़े हैं। इस असंतुलन ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने इस मामले पर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बेसिक ग्रेड के शिक्षकों को पदोन्नति देकर मध्य विद्यालयों में भेजा जाए, जिससे दोनों स्तरों पर शिक्षकों का उचित समायोजन हो सके।
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भरमार
जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या छात्रों के अनुपात में बेहद अधिक है। तबादलों से पहले छात्र-शिक्षक अनुपात के आकलन के दौरान यह खुलासा हुआ है। कई स्कूलों में 200 से भी कम छात्र नामांकित हैं, लेकिन वहां 9 से 10 शिक्षक तैनात हैं। कुछ मामलों में तो एक ही प्राथमिक विद्यालय में 10 से 16 शिक्षक तक कार्यरत हैं। यह स्थिति पहले हुए स्थानांतरण और पदस्थापन में हुई कथित अनियमितताओं की ओर भी इशारा करती है।
- प्राथमिक विद्यालय महुआरा कन्या: 170 बच्चों पर 10 शिक्षक
- प्राथमिक विद्यालय कांटा: 176 बच्चों पर 9 शिक्षक
- प्राथमिक विद्यालय गायघाट: 157 बच्चों पर 6 शिक्षक
- पटशर्मा विद्यालय: 169 बच्चों पर 9 शिक्षक (कक्षा 1-5)
- पिरौछा स्कूल: कक्षा 1-5 में 16 शिक्षक तैनात
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई स्कूलों में 10-15 बच्चों पर एक शिक्षक का अनुपात बन रहा है, जबकि अन्य 100 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में आज भी केवल एक या दो शिक्षक ही पूरी कक्षाएं संभाल रहे हैं।
मध्य विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी
एक ओर प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अधिकता है, वहीं दूसरी ओर कक्षा छह से आठ तक के मध्य विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी है। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए कई स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य के लिए चिंताजनक है।
इस गंभीर असंतुलन को दूर करने के लिए तत्काल नीतिगत निर्णय और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि जिले के सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
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