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मुजफ्फरपुर बाढ़: गायघाट में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, विधायक कोमल सिंह को घेरा

मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड की कांटा पिरौंछा दक्षिणी पंचायत में बाढ़ पीड़ितों का आक्रोश उस समय चरम पर पहुँच गया, जब स्थानीय जदयू विधायक कोमल सिंह को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विधायक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हाल जानने पहुँची थीं, लेकिन उन्हें राहत सामग्री, जीआर राशि (अनुग्रह अनुदान) और सामुदायिक रसोई शुरू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने घेर लिया और जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप था कि इलाके में बाढ़ आए हुए छह दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो विधायक ने उनकी सुध ली और न ही प्रशासन की ओर से पर्याप्त राहत मिल पाई है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण सड़कें टूट गई हैं और कई परिवार अत्यंत मुश्किल परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।

महिलाओं में विशेष नाराजगी

खासकर महिलाओं ने विधायक के देर से पहुँचने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान वोट माँगते समय विधायक खुद को ‘गायघाट की बेटी’ बताती थीं, लेकिन जीत के बाद उन्होंने एक बार भी पीड़ितों का हाल जानने की जहमत नहीं उठाई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई परिवारों को अभी तक तिरपाल और सूखा राशन तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने तत्काल राहत सामग्री के वितरण, जीआर राशि के भुगतान और सामुदायिक रसोई शुरू करने की मांग की।

बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि संकट के इस समय में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को प्रभावित परिवारों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि विधायक स्वयं नहीं पहुँच सकती थीं, तो उन्हें अपने प्रतिनिधियों या प्रशासनिक टीम को भेजकर राहत कार्यों में तेजी लानी चाहिए थी।

स्थिति बिगड़ी, प्रशासन को करना पड़ा हस्तक्षेप

ग्रामीणों ने विधायक से गाँव के अंदर चलकर बाढ़ से हुई तबाही का जायजा लेने की मांग की। बताया जाता है कि जब विधायक वहाँ से निकलने लगीं, तो लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। प्रदर्शनकारी ग्रामीण उनकी गाड़ी के आगे खड़े हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

स्थिति बिगड़ती देख, साथ मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और काफी मशक्कत के बाद विधायक को वहाँ से सुरक्षित निकाला जा सका।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू नहीं होती, राहत सामग्री नहीं मिलती और जीआर राशि का वितरण नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। इस घटना के समय अंचल अधिकारी, प्रखंड प्रमुख श्रवण कुमार सिंह, पंचायत समिति सदस्य रीना देवी, संजागर सहनी सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर मौजूद थे। बाढ़ प्रभावितों के इस विरोध के बाद अब राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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