मुजफ्फरपुर में वायरल बुखार का कहर: फेफड़ों पर गंभीर असर, संक्रमण 50 गुना तक बढ़ा
मुजफ्फरपुर में इन दिनों वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे लोगों के फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ रहा है। एसकेएमसीएच और मॉडल अस्पताल में भर्ती मरीजों की ‘डी-डाइमर’ जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फेफड़ों का संक्रमण सामान्य स्तर से लगभग 50 गुना तक बढ़ गया है। डॉक्टरों के अनुसार, डी-डाइमर का स्तर 243 से नीचे होना चाहिए, लेकिन संक्रमित मरीजों में यह 900 से 1000 तक पहुंच रहा है, जो फेफड़ों में गंभीर संक्रमण का संकेत है।
एसकेएमसीएच के उपाधीक्षक और मेडिसिन विभाग के डॉ. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि वायरल बुखार के कारण मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। इस संक्रमण के चलते मरीजों की खांसी ठीक होने में एक हफ्ते से भी ज्यादा समय लग रहा है। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्लीनिकों और लैब में भी फेफड़ों के संक्रमण वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एसकेएमसीएच की मेडिसिन विभाग की डॉ. नेहा ने भी अस्पताल में वायरल बुखार और फेफड़ों के संक्रमण के मरीजों की बढ़ती संख्या की पुष्टि की है।
कफ सिरप भी बेअसर, हायर एंटीबायोटिक की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक, कई मरीजों पर सामान्य कफ सिरप का कोई असर नहीं हो रहा है। उन्हें कफ सिरप के साथ-साथ हायर डोज की एंटीबायोटिक दवाएं देनी पड़ रही हैं। डॉ. नेहा ने बताया कि कुछ मरीजों को भाप लेने की भी सलाह दी जा रही है। वायरल संक्रमण के कारण तेज बुखार, खांसी के साथ-साथ गले में संक्रमण से आवाज भी बैठ जा रही है, जिसके लिए अलग से दवाएं देनी पड़ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज वायरल बुखार और फेफड़ों के संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मॉडल अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इस स्थिति का असर दवा बाजार पर भी पड़ा है, जहां एंटीबायोटिक और खांसी की दवाओं की बिक्री में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बुखार की दवाओं की बिक्री भी बढ़ी है।
डी-डाइमर जांच की अनुपलब्धता से गरीब मरीज परेशान
एक बड़ी समस्या यह है कि एसकेएमसीएच और मॉडल अस्पताल जैसे सरकारी संस्थानों में डी-डाइमर जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मरीजों को यह जांच कराने के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ता है, जहां उन्हें 1200 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। यह स्थिति गरीब मरीजों के लिए काफी परेशानी का सबब बन रही है, क्योंकि फेफड़ों के संक्रमण का पता लगाने के लिए यह जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में इस महत्वपूर्ण जांच की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि आम जनता को समय पर और किफायती इलाज मिल सके।
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