मुजफ्फरपुर के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान: परिवार भावुक, क्षेत्र में गर्व का माहौल
मुजफ्फरपुर, बिहार – शिक्षा और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान देने वाले दिवंगत डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उनके पुत्र डॉ. रमण त्रिवेदी ने यह सम्मान ग्रहण किया। यह क्षण मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के लिए गौरव और भावुकता से भरा रहा, जहां डॉ. त्रिवेदी ने अपना जीवन समाज सेवा में समर्पित किया था।
डॉ. गोपालजी त्रिवेदी, जो बदरा प्रखंड के पूर्व कुलपति भी रहे, ने अपने जीवनकाल में सादगी और निस्वार्थ सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पुत्र डॉ. रमण त्रिवेदी ने सम्मान ग्रहण करते हुए कहा कि पिताजी हमेशा समाज और शिक्षा के प्रति समर्पित रहे। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “उन्हें यह सम्मान मिलने से गर्व तो है, लेकिन यह दुख भी है कि आज वे इस ऐतिहासिक पल में स्वयं उपस्थित नहीं हैं। अगर वे होते और स्वयं अपना सम्मान पाते तो कुछ और ही बात होती।”
परिवार के सदस्यों और क्षेत्र के लोगों के लिए यह क्षण खुशी और गम दोनों का संगम रहा। एक ओर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री मिलने का गर्व था, वहीं दूसरी ओर डॉ. त्रिवेदी की अनुपस्थिति लगातार महसूस की जा रही थी। परिवार की महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि अगर वे आज जीवित होते तो पूरे गांव और इलाके में एक अलग ही उत्साह और पर्व जैसा माहौल होता।
मतलुपुर मंदिर न्यास समिति के सचिव बैद्यनाथ पाठक ने भी डॉ. त्रिवेदी के योगदान को याद करते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो यह पल पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए किसी पर्व से कम नहीं होता। डॉ. त्रिवेदी ने गांव में रहकर बेहद सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत किया। उन्हें कभी पुरस्कार या सम्मान की लालसा नहीं रही। वे हमेशा कहते थे कि समाज के लिए किया गया कार्य ही सबसे बड़ा सम्मान होता है। आज देश का इतना बड़ा सम्मान मिलना उनके जीवन के संघर्ष और योगदान की सच्ची पहचान है।
ग्रामीणों और शुभचिंतकों में रामकुमार त्रिवेदी, ललन त्रिवेदी, श्याम किशोर जैसे कई लोगों ने इस सम्मान को पूरे क्षेत्र का सम्मान बताया। उनका मानना है कि डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज में जो योगदान दिया, उसी का परिणाम है कि उन्हें देश के इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान ने न केवल डॉ. त्रिवेदी के परिवार का, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान और शान बढ़ाई है। यह सम्मान उनके निस्वार्थ सेवा और समाज के प्रति अटूट समर्पण की एक स्थायी विरासत है।
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