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मुजफ्फरपुर समेत पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख स्टेशनों पर अब पानी की गुणवत्ता की होगी नियमित जांच

यात्रियों को स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के लिए रेलवे बोर्ड का सख्त निर्देश

मुजफ्फरपुर सहित पूर्व मध्य रेलवे (पूमरे) के सभी बड़े स्टेशनों पर अब यात्रियों को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को स्टेशनों पर उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की निरंतर निगरानी और वाटर ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इस पहल के तहत, सोनपुर और समस्तीपुर जैसे पूमरे के प्रमुख रेल मंडलों के स्टेशनों से पानी के नमूने लेकर उनकी बैक्टीरियल और केमिकल जांच की जाएगी।

रेलवे के इस निर्देश के बाद, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और समस्तीपुर जंक्शन पर पानी की जांच की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों को पेयजल उपलब्ध कराने वाली टंकियों, पाइपलाइनों और अन्य जलस्रोतों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षकों को पानी की टंकियों की दैनिक निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। पानी की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

पहले की जांचों में मिली थी खामियां

पूर्व में रेलवे की प्रयोगशाला में लिए गए पानी के नमूनों की जांच में कई स्थानों पर कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और नाइट्रेट की उपस्थिति पाई गई थी। मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे बड़े स्टेशनों पर भी पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। इन चिंताओं के बाद ही रेलवे ने पानी की नियमित जांच और वाटर ऑडिट पर विशेष जोर दिया है।

मुजफ्फरपुर जंक्शन पर जलापूर्ति करने वाली पानी की टंकी की सफाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, टंकी की अंतिम बार सफाई मई 2024 में हुई थी। इसके बाद से अब तक सफाई न होने के कारण इसकी स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड के नए निर्देश के बाद अब टंकी की सफाई और पानी की जांच पर विशेष निगरानी की उम्मीद है।

कैग रिपोर्ट में भी पूमरे की स्थिति चिंताजनक

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। रिपोर्ट में जांच टीम ने पानी की गुणवत्ता के मामले में पूर्व मध्य रेलवे को 66.88 अंक दिए थे, जिसके आधार पर पूमरे की स्थिति नीचे से तीसरे स्थान पर थी। विभिन्न स्टेशनों के पानी में टीडीएस (कुल घुलित ठोस) की मात्रा भी अलग-अलग पाई गई थी। मुजफ्फरपुर में 438 पीपीएम, समस्तीपुर में 498 पीपीएम, मधुबनी में 130 पीपीएम, दरभंगा में 100 पीपीएम और सीतामढ़ी में 54 पीपीएम टीडीएस दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में टीडीएस की सामान्य मात्रा 150 से 300 पीपीएम के बीच होनी चाहिए।

दूषित पानी से स्वास्थ्य को खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी पीने से हैजा, डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और आंत में संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इससे पेट में कीड़े होने की समस्या भी हो सकती है। पानी में रासायनिक तत्वों की अधिकता लंबे समय तक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, जिससे किडनी और लिवर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक होने की आशंका रहती है। रेलवे का यह कदम यात्रियों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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