बिजली-पानी के विवादों में अब लोक अदालत बन रही सहारा: मुजफ्फरपुर में बढ़ रहे मामले
मुजफ्फरपुर में बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान के लिए उपभोक्ता अब तेजी से लोक अदालत का रुख कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर शिकायतों का निपटारा न होने पर लोग कानूनी रास्ते अपना रहे हैं, जहां त्वरित और आपसी समझौते से मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रशासन द्वारा 12 सितंबर को मुजफ्फरपुर में लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बकाया बिजली बिल, गलत मीटर रीडिंग, कनेक्शन काटने-जोड़ने, बिल सुधार, बाधित जलापूर्ति और पानी के कनेक्शन से संबंधित मामलों को समझौते के आधार पर निपटाना है। यह उन उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है, जिन्हें विभागीय स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिल पा रहा है।
बिजली कनेक्शन से जुड़ी शिकायतें
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। गायघाट के राहुल कुमार ने आरोप लगाया है कि नए बिजली कनेक्शन के लिए वे लंबे समय से सहायक विद्युत अभियंता कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कनेक्शन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। इसी तरह, बीवीगंज निवासी राज किशोर सिंह ने विद्युत बिल सुधार और नए कनेक्शन के मामले में स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसकी अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित है।
विद्युत उपभोक्ता मंच के सचिव राजेश कुमार के अनुसार, मुशहरी के बैकटपुर निवासी रहीसा खातून के परिजनों ने आरोप लगाया है कि कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उनके घर में बिजली नहीं पहुंची है। उन्होंने लाइनमैन पर कनेक्शन के लिए रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया है। नरौली सेन गांव के हनुमान कुमार ने बताया कि कृषि कनेक्शन के लिए पोल से बोरिंग स्थल की दूरी अधिक होने का हवाला देकर उनसे ऑनलाइन सात हजार रुपये लिए गए, लेकिन कनेक्शन नहीं मिला। इन दोनों मामलों में विभागीय जांच चल रही है और समाधान न होने पर इन्हें भी लोक अदालत में ले जाने की तैयारी है।
पानी की समस्या भी लोक अदालत में
जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतें भी लोक अदालत तक पहुंच रही हैं। मधुबनी पंचायत के वार्ड नंबर 5 में मोटर जलने के कारण जलापूर्ति ठप है। शिकायत की सुनवाई न होने पर स्थानीय लोग अब लोक अदालत जाने की तैयारी में हैं।
मड़वन प्रखंड की पकड़ी पकोही पंचायत के वार्ड-12 के वार्ड सदस्य जितेंद्र चौधरी, रामाशंकर प्रसाद, बबलू ठाकुर और अजय चौधरी भी लोक अदालत का रुख कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों पहले नल-जल कनेक्शन के लिए वाटर टैंक लगा, घर-घर नल भी लग गए और पंप चालक की बहाली भी हो गई, लेकिन पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। पानी के लिए सभी स्तरों पर प्रयास करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अब लोक अदालत ही उनके लिए एकमात्र विकल्प बचा है।
यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि मुजफ्फरपुर में नागरिक अपनी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा कर रहे हैं, खासकर जब प्रशासनिक स्तर पर उन्हें निराशा हाथ लग रही हो।
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