मुजफ्फरपुर जंक्शन पर चेन स्नेचर्स का आतंक: धुंधले सीसीटीवी फुटेज के आगे बेबस हुई पुलिस
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर यात्रियों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बीते 31 मई को बरौनी-नई दिल्ली ट्रेन में सवार एक महिला यात्री से हुई चेन स्नेचिंग की घटना ने रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अब तकनीकी खामियों और पुराने कैमरों के कारण अपराधियों तक पहुँचने में संघर्ष कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
घटना उस समय हुई जब दरभंगा-नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन के बी-1 कोच में सवार गीता कुमारी के गले से सात-आठ बदमाशों ने भीड़ का फायदा उठाकर करीब ढाई लाख रुपये की सोने की चेन उड़ा ली। घटना के तुरंत बाद रेल एसपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को सबसे बड़ी बाधा जंक्शन पर लगे पुराने और कम क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे बने हुए हैं।
जांच में आ रही तकनीकी बाधाएं
एसआईटी के अनुसार, जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 पर कैमरों की संख्या काफी कम है। जिन स्थानों पर कैमरे लगे भी हैं, उनकी फुटेज इतनी धुंधली है कि संदिग्धों के चेहरे की पहचान करना लगभग असंभव हो गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि स्टेशन पर आधुनिक हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे होते, तो अपराधियों की पहचान अब तक हो चुकी होती।
- फुटेज में संदिग्धों की गतिविधियां तो दिख रही हैं, लेकिन चेहरा स्पष्ट नहीं है।
- सीतामढ़ी जैसे स्टेशनों पर तो कैमरों की स्थिति और भी बदतर है।
- पुलिस अब मोबाइल टावर लोकेशन और पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड के जरिए सुराग तलाश रही है।
सुरक्षा पर यात्रियों की चिंता
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से यात्रियों में डर का माहौल है। यात्रियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर जैसे व्यस्त जंक्शन पर सघन निगरानी व्यवस्था और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम की सख्त जरूरत है। रेलवे बोर्ड द्वारा सुरक्षा के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि अपराधी आज भी कमजोर निगरानी वाले क्षेत्रों का फायदा उठाकर आसानी से फरार हो जाते हैं। फिलहाल, एसआईटी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
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