मुजफ्फरपुर में आलू किसानों पर दोहरी मार: बंपर पैदावार के बावजूद बर्बादी की कगार पर किसान
मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड में आलू किसानों की मेहनत और उम्मीदें दोनों मिट्टी में मिल रही हैं। इस साल बंपर पैदावार के बावजूद, उचित मूल्य और खरीदारों की कमी ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। खेतों में तैयार आलू अब सड़ने लगा है, और किसान अपनी फसल को सड़कों और खेतों के किनारे फेंकने को मजबूर हैं।
लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
बंदरा के किसानों के लिए आलू की खेती अब घाटे का सौदा साबित हो रही है। रामपुरदयाल के किसान रौशन कुशवाहा और तेपरी के मनीष ठाकुर जैसे कई किसानों ने बताया कि महंगे बीज, खाद और सिंचाई पर भारी-भरकम खर्च करने के बाद इस बार आलू की पैदावार तो शानदार हुई थी, लेकिन बाजार में मांग पूरी तरह ठप होने से लागत निकालना भी पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल हो गया है। किसानों को अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे परिवहन और मजदूरी का खर्च भी निकलना मुश्किल है।
भंडारण की कमी और बिचौलियों का राज
किसानों ने बेहतर कीमत की उम्मीद में अपनी उपज का एक हिस्सा कोल्ड स्टोरेज में रखा था, जबकि कुछ को घरों में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन क्षेत्र में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और संगठित मंडियों की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। भीषण गर्मी के कारण घरों में रखा लगभग 50 प्रतिशत आलू सड़ने लगा है, जिसे रोजाना छांटकर फेंकना पड़ रहा है। इस स्थिति का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं, जो किसानों की मजबूरी का लाभ उठाकर बेहद कम दामों पर आलू खरीदने की पेशकश कर रहे हैं।
सरकारी हस्तक्षेप की मांग
लाचार और कर्ज के बोझ तले दबे बंदरा के किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में सरकारी स्तर पर आलू की खरीद सुनिश्चित करना, स्थानीय स्तर पर आधुनिक भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) सुविधाओं का विकास करना और बड़ी मंडियों की स्थापना करना शामिल है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो भविष्य में वे आलू की खेती से पूरी तरह मुंह मोड़ लेंगे, जिससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक है।
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