Corona Virus

क्या होता है कोरोनावायरस ? कैसे एक इंसान को लग जाता है? और हमें क्या करना चाहिए?

December 2019, चीन देश के Wuhan शहर में एक नया वायरस पाया गया, यह वायरस जल्दी पूरे चीन देश फैल गया और आने वाले कुछ महीनों में ही पूरी दुनिया में। इस वायरस का नाम है सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम रिलेटेड कोरोनावायरस 2 (Severe Acute Respiratory Syndrome Realated Corona Virus 2)
इस से COVID-19 नाम की एक बीमारी होती है जिसे सब लोग कोरोनावायरस भी बोलते हैं।
क्या होता है जब यह कोरोनावायरस एक इंसान को लग जाता है और हमें क्या करना चाहिए?

Source : Snip taken from YouTube of Kurzgesagt – In a Nutshell

वायरस (Virus) असल में सिर्फ एक खोखला डब्बा होता है जिसके अंदर कुछ जेनेटिक सामान और प्रोटीन होता है। वायरस जब किसी जीवित सेल के अंदर घुस जाए तभी अपने जैसा और भी क्लोन बना सकता है |

Advertisement

कोरोना वायरस भले ही अलग-अलग सामान से चिपक कर फैल जाता है लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि कहां पर कितनी देर यह जिंदा रह सकता है |

 

Source : Snip taken from YouTube of Kurzgesagt – In a Nutshell

इस कोरोना वायरस के फैलने की असल वजह यह होती है जब एक कोरोनावायरस बीमार खांसता है और उस खांसी के बूंद एक स्वस्थ आदमी तक पहुंच जाते है या फिर जब हम अपने वायरस लगे हाथ से नाक या आंख को छूते हैं।

यहां से शुरू होता है वायरस का हमारे शरीर पर हमला। हमारे मुंह या नाक के जरिए हमारे अंदर आंत, स्प्लीन,या फिर फेफड़े तक पहुंच जाता है जहां सबसे ज्यादा खतरा पैदा करता है।

Source : Snip taken from YouTube of Kurzgesagt – In a Nutshell

हमारे फेफड़ों के सबसे उपर के सतह पर करोड़ों कोशिका (cells) होते हैं जिनका नाम एपिथेलियल सेल्स (Epithelial Cells)  है।
एक तरह से समझिए यह सेल्स हमारे अंगों के लिए बॉर्डर की सुरक्षा है।अब सबसे पहले कोरोनावायरस किसी एक् cell के अंदर अपना वायरस वाला जेनेटिक मैटेरियल डाल देता है। उस छोटे कोशिका को यह समझ ही नहीं आता है कि क्या हुआ और वायरस तब तक अंदर ही अंदर एक से दो और दो से चार के हिसाब से बढ़ता रहता है। जब सेल के अंदर में वायरस बहुत जयाद बढ़ जाता है तो वह सेल फट जाता है और अंदर के वायरस दूसरे सेल्स को तबाह करने के लिए निकल जाते हैं। इस तरह से बीमार सेल्स की संख्या बहुत ही तेजी से बढ़ने लगती है। सिर्फ 10 दिनों के अंदर में ही लाखों की संख्या में सेल्स बीमार हो चुके होते हैं और पूरा का पूरा फेफड़ा उन वायरस से भर चुका होता है।

लेकिन अभी तक तो वायरस ने आपको कुछ नुकसान पहुंचाया ही नहीं है क्योंकि असली वायरस का हमला तो इसके बाद होता है।

हमारे शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए सिस्टम मौजूद हैं उनको अंग्रेज़ी में इम्यून सिस्टम (IMMUNE SYSTEM) कहा जाता है। वैसे तो हमारा इम्यून सिस्टम हम को बचाने के लिए होता है लेकिन अगर उसके रूल रेगुलेशन में कुछ छेड़खानी हो गई तो यही इम्यून सिस्टम हमारे लिए जानलेवा हो सकता है।

जब कोरोनावायरस हमारे फेफड़ों में हमला कर चुका होता है उस समय हमारे इम्यून सिस्टम का सेल उन सभी वायरस से लड़ने आता है लेकिन उसी समय कोरोनावायरस इम्यून सेल्स में से भी कुछ के अंदर घुस जाता है। अब यहां कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो जाती है कि कौन सा सेल ठीक है और कौन बीमार ।

सेल्स के पास आंख तो होते नहीं कि वह देख सके, इसलिए आपस में बातचीत करने के लिए साइटोकाइन नाम के प्रोटीन का सहारा लेते हैं। हर एक महत्वपूर्ण बातचीत इसी साइटोंकाइन नामक प्रोटीन के जरिए होता है

अब जितने भी इम्यून सेल्स बीमार हो चुके होते हैं, वह साइटोंकाइन के जरिए ऐसा बढ़ा चढ़ा कर मैसेज भेजना शुरू करते हैं कि सारे इम्यून सेल्स का मर्डर हो गया, बचाओ !
इस वजह से इम्यून सेल जरूरत से ज्यादा लड़ने वाले सिपाही भेज देता है इसमें खासतौर से 2 नाम के सेल ज्यादा खतरनाक होते हैं

  1. पहला न्यूट्रोफाइल नाम का सेल जो की बीमारी वाली जगह पहुंचते हैं बिना कोई फर्क के एंजाइम डालकर सब को मारना शुरू कर देता है चाहे वह स्वस्थ सेल हो या फिर बीमार सेल
  2. दूसरा सेल जिसका नाम है KILLER T-cell, असल में इस सेल का काम होता है कि यह बीमार सेल को सुसाइड करने का ऑर्डर दे लेकिन इतना ज्यादा कंफ्यूजन हो चुका होता है कि कौन बीमार है और कौन स्वस्थ, यह बिना सोचे समझे हर एक सेल को सुसाइड करने का मैसेज भेजने लगता है।
Source : Snip taken from YouTube of Kurzgesagt – In a Nutshell

और इस तरह से जितने ज्यादा इम्यून सेल्स हमारे फेफड़ों तक पहुंचते हैं उतनी ज्यादा तबाही और भी बढ़ती है। ऐसा भी हो सकता है कि हमारे फेफड़ों में डैमेज इतना ज्यादा हो जाए जो वापस कभी ठीक ना हो पाए

अभी तक के ज्यादातर केस में तो ऐसा होता है कि इम्यून सेल्स सारे वायरस को खत्म करके हमारे फेफड़ों को साफ कर देते हैं और यहां से वापस स्वस्थ होने का प्रक्रिया शुरू हो जाता है। ज्यादातर लोग जो CORONA से बीमार हो चुके हैं वह स्वस्थ हो जाएंगे लेकिन कुछ ऐसे भी केस होते हैं जो बहुत ही ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं।

कुछ ऐसा भी केस होता है जब हमारे बॉर्डर वाले एपिथेलियल सेल्स पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं और हमारे फेफड़ों की बॉर्डर की सुरक्षा खत्म हो जाती है फिर यह वायरस हमारे फेफड़े की सांस वाली थैलियों में घुस जाता है और उसके बाद सांस लेने में बहुत तकलीफ शुरू हो जाती है। ऐसे मरीजों को फिर वेंटिलेटर की जरूरत होती है सांस लेने के लिए। इम्यून सिस्टम भी लगातार इतने दिनों तक वायरस से लड़ते-लड़ते थक चुका होता है और चुकी वायरस लगातार दुगुना चौगुना के हिसाब से बढ़ता होता है, वायरस की संख्या हमारे इम्यून सिस्टम पर हावी हो जाती है और हमारे खून में वायरस घुस जाता है। जब ऐसा हो जाता है फिर मौत निश्चित है

CORONA जैसे महामारी के फैलने का दो अलग अलग तरीका हो सकता है

  1. एक तेजी से फैलना
  2. दूसरा धीरे-धीरे फैलना

यह दोनों तरीका हम लोगों पर टिका होता है कि वायरस फैलने के शुरुआती दिनों में हमने किस तरह से एहतियात बरता।अगर महामारी तेजी से फैलता है तो फिर तो भयानक और विकराल ही है । क्योंकि इसमें बहुत से लोगों की जान जाएगी।वहीं पर अगर यह महामारी धीरे-धीरे फैलती है तो फिर उपचार के लिए समय मिल पाएगा और फिर ज्यादा लोग स्वस्थ हो पाएंगे सिर्फ कुछ लोग ही इससे मृत्यु का शिकार होंगे

समझने के लिए ऐसा सोचिए।
जब महामारी तेजी से फैलता है तो हमारा हॉस्पिटल में इलाज करने का जो कैपेसिटी है उससे ज्यादा लोग बीमार होना शुरू कर देते हैं नतीजा बहुत सारे लोगों की मौत। क्योंकि हमारे पास मेडिकल सामान और वेंटिलेटर और हॉस्पिटल गिनती के हिसाब से हैं लेकिन मरीजों की संख्या अचानक बहुत ज्यादा हो जाएगी और सब लोगों का इलाज हो नहीं पाएगा। फिर बहुत सारे लोग इलाज़ की कमी के वजह से मर जाएंगे।

ऐसी भयानक स्थिति पैदा होने से बचने के लिए हम सब लोगों को हर एक वह कदम उठाना पड़ेगा जिससे कि इस महामारी को धीरे किया जा सके। खासकर के शुरुआती दिनों में ठोस कदम उठाने से आगे चलकर बहुत फायदा मिलता है।

इससे फायदा यह होगा की एक साथ में मरीजों की संख्या कम होगी इससे लगभग सब लोगों का इलाज मुमकिन हो सकेगा और सब लोग ठीक हो सकेंगे क्योंकि हमारे पास अभी तक ना इसकी कोई दवा है ना ही कोई टीका है,
तो अभी इससे बचने का एक ही उपाय है एहतियात,

आसान भाषा में कहें तो हमें सिर्फ दो काम करना है

  1. पहला खुद को वायरस से बचाना है
  2. दूसरों को वायरस लगने देने से बचाना है

और इसका सबसे अच्छा उपाय है अपने हाथों को बार-बार धोते रहना।

असल में कोरोना वायरस एक तरह के चर्बी से ढका होता है लेकिन जैसे ही इसके ऊपर साबुन पड़ता है, इसके ऊपर की चर्बी वाली सतह टूट कर बिखर जाती है उसके बाद यह किसी दूसरे को बीमार करने लायक ही नहीं रहता

अगर आपको यह समझना है कि साबुन से अच्छे से हाथ कैसे धोएं।
ऐसा सोचिए अभी-अभी अब आपने बहुत ही तेज मिर्ची को छुआ है और अब आपको अपनी आंखों को छूना है तो आप अपने हाथों को कैसे धुलेंगे?

दूसरा काम करना है समाज में एक दूसरे से मिलना जुलना बिल्कुल बंद करना। अगर आप खुद के लिए घर पर नहीं रह सकते उन डॉक्टरों का सोचिए जो आपके लिए अपनी जान पर खेलकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। उनके लिए घर पर रहिए

देश और राज्य के लेवल पर लॉक डाउन और क्वॉरेंटाइन करना

हां यह सही है कि क्वॉरेंटाइन (Quarantine) अच्छा नहीं लगता ,पसंद वाली चीज नहीं है लेकिन इस बात को समझिए कि क्वॉरेंटाइन क्यों किया जा रहा है।
खुद को और अपने परिवार के लोगों को बचाने के लिए क्वॉरेंटाइन का रिस्पेक्ट(respect) करिए

CORONA VIRUS से जुड़ी हर एक जानकारी एक जगह पाने के लिए इस वेबसाइट पर क्लिक करिये

Tags

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button
Close